"शुभ दोपहर, शनिवार मुबारक हो"-आराम से टहलना

Started by Atul Kaviraje, October 25, 2025, 09:47:36 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ दोपहर, शनिवार मुबारक हो"

पेड़ों से घिरी सड़क पर आराम से टहलना

आराम से टहलना

चरण १
प्रकृति के आनंद में एक सैर 🌞
आत्मा को सुकून देने वाली, दृष्टि को शांति देने वाली 🌿
शांत वातावरण, एक कोमल हवा 🌸
शांति मिली, चिंताएँ दूर हो गईं 💆�♀️

चरण २
पेड़ ऊँचे खड़े, एक रखवाले की नज़र की तरह 🌳
छायाएँ नाचती हैं, कोमल धुंध में 🌫�
सरसराते पत्ते, एक कोमल गीत 🎶
प्रकृति का संगीत, दिनभर चलता 🌟

चरण ३
फूल खिलते हैं, जीवंत रंग बिखेरते 🌺
सुगंधित खुशबू, एक मधुर आवाज 🌸
मधुमक्खियाँ गुनगुनाती हैं, खुशी से रस इकट्ठा करतीं 🐝
प्रकृति की सुंदरता, देखने लायक एक अनमोल चीज़ 🌼

चरण ४
सूरज चमकता है, एक गर्म स्पर्श ☀️
एक कोमल हवा, एक सुकून भरा स्पर्श 💨
दुनिया जागती है, ताज़ी और नई 🌞
एक नया दिन शुरू होता है, नई उम्मीदों के साथ 🌟

चरण ५
जंगल फुसफुसाता है, एक कोमल स्वर 🌲
एक शांत आश्रय, जहाँ दिल घर जैसा महसूस करे 🏠
पेड़ों का ज्ञान, साझा करने के लिए एक सबक 🌳
एक शांति की भावना, जिसकी कोई तुलना नहीं 🙏

चरण ६
नदी बहती है, एक कोमल धारा 🌊
जीवन को दर्शाती, अपने सपनों में 🌟
पानी का गीत, एक मधुर तान 🎶
प्रकृति का सुर, जिसे हराया नहीं जा सकता 🌻

चरण ७
तारे दिखते हैं, एक चमकदार शो 🌠
एक आकाशीय प्रदर्शन, अपनी चमक में 🌟
दुनिया शांत हो गई, शांत नींद में 😴
सपने खुलते हैं, रात की गोद में 🌙�

--अतुल परब
--दिनांक-25.10.2025-शनिवार.
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