'आई संतुबाईच्या नावानं चांगभलं!' 🌸 हिंदी कविता: 'आई संतुबाई की महिमा' 🌸-

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 10:45:24 AM

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Atul Kaviraje

'आई संतुबाईच्या नावानं चांगभलं!'

🌸 हिंदी कविता: 'आई संतुबाई की महिमा' 🌸-

चरण 01

हेरवाड़ में देवी का धाम, (🏡)
संतुबाई को मेरा प्रणाम। (🙏)
शिरोळ तालुका का है ये मान, (🚩)
भक्ति का गूँजे मधुर गान। (🎶)

अर्थ: हेरवाड़ गाँव में देवी संतुबाई का मंदिर है, मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ। यह मंदिर शिरोळ तालुका का गौरव है, जहाँ भक्ति का मधुर गीत गूँज रहा है।

चरण 02

नवस पूरा करती हर बार, (✨)
भक्तों का करती है उद्धार। (💖)
संकटों को देवी भगाती, (🚫)
जीवन में खुशियाँ लाती। (😄)

अर्थ: देवी हर बार भक्तों की मन्नतें पूरी करती हैं, और उनका उद्धार करती हैं। देवी सभी संकटों को दूर भगाती हैं, और जीवन में खुशियाँ लाती हैं।

चरण 03

काँधे पर पालकी चलती, (👑)
भक्ति की गंगा बहती। (💧)
पैदल आते भक्त हैं सारे, (🚶)
प्रेम से पुकारें देवी के नारे। (📣)

अर्थ: भक्तों के कंधों पर देवी की पालकी चलती है, और भक्ति की धारा बहती है। सभी भक्त पैदल चलकर आते हैं, और प्रेम से देवी के जयकारे लगाते हैं।

चरण 04

गोंधळ का रंग जमा है आज, (🎤)
देवी का करते हैं हम काज। (🙏)
कथाएँ सुनके मन हर्षाए, (📖)
जीवन का पथ ज्योति से जगमगाए। (🪔)

अर्थ: आज गोंधळ (लोक-कला) का रंग जमा हुआ है, हम देवी का कार्य कर रहे हैं। देवी की कथाएँ सुनकर मन प्रसन्न हो जाता है, और जीवन का रास्ता प्रकाश से भर जाता है।

चरण 05

महाप्रसाद का बँटा है भोग, (🍚)
मिटा है समाज का हर रोग। (🧡)
सब मिलजुल कर भोजन करते, (🤝)
एकता का संदेश धरते। (🧑�🤝�🧑)

अर्थ: सामुदायिक भोजन (महाप्रसाद) का प्रसाद बँटा है, जिससे समाज की हर बुराई दूर हो गई है। सब लोग मिलकर भोजन करते हैं, और एकता का संदेश धारण करते हैं।

चरण 06

शुक्रवार है आज का दिन, (🗓�)
देवी की भक्ति में मन लीन। (🧘)
अभिषेक से मन को शांति, (🚿)
जीवन में आए अब क्रांति। (🚀)

अर्थ: आज शुक्रवार का दिन है, मन देवी की भक्ति में डूबा हुआ है। अभिषेक से मन को शांति मिलती है, और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।

चरण 07

संतुबाई की महिमा न्यारी, (🌟)
भक्तों को करती हैं प्यारी। (🥰)
हेरवाड़ धाम अमर रहे, (🏡)
हर भक्त के मुख से जय निकले। (📣)

अर्थ: संतुबाई देवी की महिमा अद्भुत है, वे भक्तों पर प्रेम बरसाती हैं। हेरवाड़ का यह धाम हमेशा अमर रहे, और हर भक्त के मुख से उनकी जयकार निकले।

--अतुल परब
--दिनांक-24.10.2025-शुक्रवार.
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