🐂 आबासाहेब देव यात्रा:जय आबासाहेब! चांगभलं!'वडगाव के आबासाहेब' 🌸

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 10:46:30 AM

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Atul Kaviraje

🐂 आबासाहेब देव यात्रा: वडगाव, तालुका माण (सातारा) - वीरत्व और श्रद्धा का संगम 🚩

जय आबासाहेब! चांगभलं!

🌸 हिंदी कविता: 'वडगाव के आबासाहेब' 🌸

चरण   कविता (04 पंक्तियाँ)   अर्थ

01   वडगाव में आबासाहेब विराजें, (🏡)
भक्त सारे मिलकर आज साजें। (🎊)
मान तालुका का है ये गौरव, (🚩)
देव करें भक्तों पर पौरव। (🛡�)   वडगाव गाँव में आबासाहेब देव विराजमान हैं, भक्त आज मिलकर उत्सव की तैयारी कर रहे हैं। यह मंदिर मान तालुका का गौरव है, देव भक्तों पर अपनी शक्ति बरसाते हैं।

02   'आबा' कहके भक्त पुकारें, (💖)
वे जीवन की नैया पार उतारें। (🛶)
सूखाग्रस्त धरती की है आस, (🏜�)
देव बरसाएँ जल का वास। (💧)   भक्त 'आबा' कहकर उन्हें पुकारते हैं, और वे जीवन की नाव को पार लगाते हैं। सूखी धरती को उनसे ही उम्मीद है, देव उन पर जल बरसाएँ।

03   बैलगाड़ी की दौड़ है खास, (🐂)
वीरत्व का होता यहाँ वास। (💪)
कुश्ती के मैदान में दंगल, (🤼)
हर चेहरे पर हर्ष का मंगल। (😄)   बैलगाड़ी की दौड़ यहाँ का खास आकर्षण है, जहाँ बहादुरी का निवास होता है। कुश्ती के मैदान में दंगल होता है, और हर चेहरे पर खुशी दिखाई देती है।

04   भजन-कीर्तन गूँजे हर ओर, (🎶)
नवस की परंपरा का जोर। (✅)
मन की मुरादें होतीं पूरी, (🔑)
भक्ति की डोर न होती अधूरी। (🔗)   भजन और कीर्तन हर तरफ गूँज रहे हैं, मन्नतें पूरी होने की परंपरा का प्रभाव है। मन की इच्छाएँ पूरी होती हैं, और भक्ति की डोर कभी नहीं टूटती।

05   महाप्रसाद का बँटा है ग्रास, (🍚)
मिटा है ऊँच-नीच का त्रास। (🧡)
सब भक्त एक होकर खाते, (🤝)
भाईचारे का पाठ पढ़ाते। (🫂)   सामुदायिक भोजन (महाप्रसाद) का निवाला बँटा है, जिससे सामाजिक भेदभाव का दुःख मिटा है। सभी भक्त एक होकर खाते हैं, और भाईचारे का पाठ पढ़ाते हैं।

06   शुक्रवार है आज का दिन, (🗓�)
सेवा में हो सब मन लीन। (🧘)
देव हमें शक्ति प्रदान करें, (🌟)
हर कष्ट को दूर हरण करें। (🚫)   आज शुक्रवार का दिन है, सब लोग देव की सेवा में मग्न रहें। देव हमें शक्ति प्रदान करें, और सभी कष्टों को दूर करें।

07   आबासाहेब की जय-जयकार, (📣)
वडगाव में भक्ति अपार। (💖)
यह धाम हमेशा रहे आबाद, (🏡)
गूँजे हर क्षण शुभ संवाद। (💬)   आबासाहेब देव की जय-जयकार हो, वडगाव में अपार भक्ति है। यह धाम हमेशा खुशहाल रहे, और हर पल शुभ बातें गूँजें।

--अतुल परब
--दिनांक-24.10.2025-शुक्रवार.
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