आत्मनिर्भर भारत अभियान: एक आकलन-आत्मविश्वास की उड़ान-आत्मनिर्भरता का पथ-

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 10:49:46 AM

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Atul Kaviraje

आत्मनिर्भर भारत अभियान: एक आकलन-

आत्मनिर्भर भारत अभियान: एक आकलन (Aatmanirbhar Bharat Abhiyan: An Assessment)

हिंदी कविता - आत्मविश्वास की उड़ान-

शीर्षक: आत्मनिर्भरता का पथ-

चरण 01
पंक्तियाँ:
आत्मनिर्भर भारत, नया है प्रण,
खुद के बल पर बढ़ना, यही है रण।
लोकल को बनाओ अब अपनी पहचान,
विश्व बाजार में हो भारत महान।
अर्थ: आत्मनिर्भर भारत एक नया संकल्प है। स्वयं की शक्ति पर आगे बढ़ना ही हमारा लक्ष्य है। हमें अपने स्थानीय उत्पादों को अपनी पहचान बनाना है, ताकि भारत विश्व बाजार में महान बन सके।

चरण 02
पंक्तियाँ:
संस्कृति हमारी, तकनीक हमारी,
शक्ति से भरी है यह दुनिया सारी।
20 लाख करोड़ का यह है सहारा,
अर्थव्यवस्था को मिला नया किनारा।
अर्थ: हमारी संस्कृति और हमारी तकनीक ही हमारी शक्ति है। 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज इस अभियान का आधार है, जिसने अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी है।

चरण 03
पंक्तियाँ:
MSME उद्योग, अब बढ़ो आगे,
सरकारी सहायता का दरवाजा जागे।
विनिर्माण को मिला 'PLI' का साथ,
देश का विकास अब अपने ही हाथ।
अर्थ: छोटे और मझोले उद्योगों को आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि सरकारी सहायता उनके लिए उपलब्ध है। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) के कारण विनिर्माण क्षेत्र को बल मिला है, और अब देश का विकास हमारे अपने हाथों में है।

चरण 04
पंक्तियाँ:
किसान बने अब भाग्य का विधाता,
खेत से बाज़ार तक खुद ही रचियता।
कोष मिले कृषि को, न हो कोई रोना,
अन्नदाता का सपना अब है सलोना।
अर्थ: किसान अब अपने भाग्य के निर्माता हैं, जो खेत से लेकर बाजार तक अपनी उपज को स्वयं नियंत्रित कर सकते हैं। कृषि क्षेत्र को पर्याप्त धन मिला है, ताकि कोई निराशा न हो, और अन्नदाता का सपना अब सुंदर है।

चरण 05
पंक्तियाँ:
रक्षा में न लेंगे अब कोई उधार,
स्वदेशी शस्त्रों से हो अपनी पुकार।
टेक्नोलॉजी हो अपनी, स्पेस हो अपना,
भारत का ऊँचा अब, गौरव का सपना।
अर्थ: अब हमें रक्षा उपकरणों के लिए किसी से उधार नहीं लेना है। हमारी ताकत स्वदेशी हथियारों से दिखाई देगी। टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष क्षेत्र पर हमारा अपना नियंत्रण हो, यही भारत के ऊँचे गौरव का सपना है।

चरण 06
पंक्तियाँ:
सुधार की राह चली, पारदर्शिता आई,
ईज़ ऑफ बिज़नेस की बजी शहनाई।
हर नागरिक बने इसमें भागीदार,
तभी सफल होगा यह महान उपकार।
अर्थ: सुधारों का मार्ग प्रशस्त हुआ है, और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आई है। व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) के कारण एक सकारात्मक माहौल बना है। जब हर नागरिक इस अभियान में भाग लेगा, तभी यह महान प्रयास सफल होगा।

चरण 07
पंक्तियाँ:
चुनौतियाँ बड़ी हैं, पर मंज़िल है दूर नहीं,
भारत की क्षमता, अब है भरपूर यहीं।
विश्व गुरु बनने की यह है तैयारी,
आत्मविश्वास से भरी, अपनी यह यारी।
अर्थ: चुनौतियाँ भले ही बड़ी हों, लेकिन हमारी मंज़िल अब दूर नहीं है। भारत में क्षमता की कोई कमी नहीं है। विश्व गुरु बनने की यह हमारी तैयारी है, जो हमारे आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित है।

--अतुल परब
--दिनांक-25.10.2025-शनिवार.
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