संत बंसी महाराज तांबे पुण्यतिथि:'ज्ञानेश्वरीची मशाल घेऊन चालणारे वारकरी''-

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 10:51:37 AM

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Atul Kaviraje

संत बंसी महाराज तांबे पुण्यतिथि: नेवासा (नगर) - त्याग, गुरुभक्ति और ज्ञान का प्रकाश 🕯�

'ज्ञानेश्वरीची मशाल घेऊन चालणारे वारकरी'

🌸 हिंदी कविता: 'गुरु बंसी का प्रकाश' 🌸

चरण 01
कविता (04 पंक्तियाँ):
नेवासा की पावन भूमि, (🏡)
जहाँ ज्ञान की ज्योति है घूमी। (💡)
बंसी महाराज को नमन आज, (🙏)
पुण्यतिथि पर करते हम काज। (📅)
हिंदी अर्थ: नेवासा की पवित्र भूमि पर, जहाँ ज्ञान का प्रकाश फैला है। आज हम बंसी महाराज को नमन करते हैं, उनकी पुण्यतिथि पर यह कार्य करते हैं।

चरण 02
कविता (04 पंक्तियाँ):
वारकरी के सच्चे संत, (🚩)
जिनका त्याग न हो अंत। (💎)
ज्ञानेश्वरी का पाठ सिखाया, (📚)
हरिनाम की धुन को फैलाया। (🎤)
हिंदी अर्थ: वे वारकरी संप्रदाय के सच्चे संत थे, जिनका त्याग कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने ज्ञानेश्वरी का पाठ पढ़ाया, और भगवान के नाम का संगीत फैलाया।

चरण 03
कविता (04 पंक्तियाँ):
कीर्तन, प्रवचन गूँजे कान, (🎶)
त्याग-मूर्ति का करते बखान। (🗣�)
भौतिक सुखों का मोह न था, (❌)
संत सेवा में ही जीवन जथा। (💫)
हिंदी अर्थ: कीर्तन और प्रवचन हमारे कानों में गूँजते हैं, त्याग की मूर्ति का गुणगान करते हैं। उन्हें भौतिक सुखों का लालच नहीं था, उनका जीवन केवल संत सेवा में ही बीता।

चरण 04
कविता (04 पंक्तियाँ):
शिष्यों ने मिलकर दी दीक्षा, (🧑�🤝�🧑)
हर मन में भरी ज्ञान-भिक्षा। (🧠)
गुरु-शिष्य की अटूट परंपरा, (🧑�🏫)
चलती रहे यह भक्ति-धारा। (🌊)
हिंदी अर्थ: शिष्यों ने मिलकर उनसे दीक्षा ली, उन्होंने हर मन में ज्ञान की भीख भरी। गुरु और शिष्य की यह अटूट परंपरा, यह भक्ति की धारा चलती रहे।

चरण 05
कविता (04 पंक्तियाँ):
कार्तिक मास की शुभ तिथि, (🗓�)
मन में जगी है सच्ची प्रीति। (🧡)
अखंड हरिनाम का है व्रत, (🥁)
भक्ति का यह अद्भुत पथ। (🛣�)
हिंदी अर्थ: कार्तिक मास की यह शुभ तिथि है, मन में सच्ची श्रद्धा जागी है। लगातार भगवान के नाम का जाप (हरिनाम) का व्रत है, भक्ति का यह अद्भुत मार्ग है।

चरण 06
कविता (04 पंक्तियाँ):
नेवासा का पैस खांब, (🏰)
जहाँ ज्ञान था बिना थाम। (📜)
बंसी बाबा ने किया विकास, (🏗�)
भक्तों को देते ज्ञान का वास। (✨)
हिंदी अर्थ: नेवासा का पैस खांब मंदिर है, जहाँ ज्ञान बिना रुके मिला था। बंसी बाबा ने उसका विकास किया, वे भक्तों को ज्ञान का निवास देते हैं।

चरण 07
कविता (04 पंक्तियाँ):
आज समाधि पर शीश झुकाएँ, (🕯�)
उनके आदर्शों को अपनाएँ। (✅)
गुरुदेव बंसी महाराज की जय, (📣)
जीवन में होवे सब निर्भय। (🛡�)
हिंदी अर्थ: आज हम उनकी समाधि पर अपना सिर झुकाएँ, उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। गुरुदेव बंसी महाराज की जय हो, जीवन में सब निडर हों।

--अतुल परब
--दिनांक-25.10.2025-शनिवार.
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