🛡️ पांडव पंचमी:-'यतो धर्मस्ततो जयः' - जहाँ धर्म है, वहीं विजय है।-

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 11:23:58 AM

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Atul Kaviraje

🛡� पांडव पंचमी: धर्म की विजय, साहस और सौभाग्य का पर्व 🚩

'यतो धर्मस्ततो जयः' - जहाँ धर्म है, वहीं विजय है।

🌸 हिंदी कविता: 'पांडव पंचमी का संदेश' 🌸-

01
कार्तिक शुक्ल पंचमी आई, (🗓�)
पांडवों की महिमा है गाई। (👑)
तेरह वर्षों का दुःख सहा, (😥)
धर्म पर चलकर विजय रहा। (🚩)

02
युधिष्ठिर की सत्यनिष्ठा, (⚖️)
भीम का बल अद्भुत था। (💪)
अर्जुन की धनुष टंकार, (🏹)
नकुल-सहदेव का ज्ञान अपार। (🧠)

03
पाँचों वीरों की गाएँ कथा, (📜)
घर-आँगन में खुशियाँ यथा। (🏡)
गोबर से प्रतिमा सजाएँ, (🐄)
प्रभु कृष्ण को भी मनाएँ। (💙)

04
यह 'लाभ पंचमी' भी कहलाती, (💰)
व्यापार में समृद्धि लाती। (💼)
जैनों की 'ज्ञान पंचमी' पावन, (💡)
विद्या का हो जीवन में श्रावण। (📖)

05
छठ का 'खरना' भी है आज, (☀️)
व्रती रखती व्रत का काज। (🥣)
सूर्यदेव को करती है नमन, (🙏)
निर्मल होता उनका तन-मन। (✨)

06
धर्म-धैर्य का सीख है सार, (🔑)
हर कठिनाई हो जाए पार। (✅)
पांडव जैसे गुण घर आएँ, (👶)
वीर पुत्र का आशीर्वाद पाएँ। (⚔️)

07
विजय-दिवस की जयजयकार, (📣)
जीवन में हो खुशियों की बहार। (🌸)
पांडव पंचमी का पर्व महान, (🎉)
करता सबके कष्टों का दान। (💫)

--अतुल परब
--दिनांक-26.10.2025-रविवार.
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