🕌 गैबी पीर उरूस-'सर्वधर्म समभाव' -'गैबी पीर की शान' 🌸

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 11:27:47 AM

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Atul Kaviraje

🕌 गैबी पीर उरूस, काग़ल (कोल्हापुर): एकता और श्रद्धा का संगम 🌺

'सर्वधर्म समभाव' - सभी धर्मों के प्रति समान आदर।

🌸 हिंदी कविता: 'गैबी पीर की शान' 🌸

01
काग़ल में उरूस है आया, (🗓�)
गैबी पीर का जश्न है छाया। (🕌)
हिंदू-मुस्लिम सब साथ हैं, (🤝)
एकता की मीठी बात है। (💖)

02
आस्था की चादर चढ़ाएँ, (💐)
मन्नत के धागे बाँधें। (✨)
दरगाह की रहमत पाई, (😇)
हर चेहरे पर ख़ुशी आई। (😊)

03
कव्वाली रात भर गाएँ, (🎶)
सूफी रंग में रंग जाएँ। (🎤)
ढोल-नगारे की धुन गूँजी, (🥁)
दिल की हर आशा पूँजी। (🔑)

04
घाटगे की पालखी आई, (👑)
गलेफ की शान है छाई। (🚶)
परंपरा का मान रखा, (🛡�)
प्रेम का सबको ज्ञान दिया। (💡)

05
लंगर का खाना है प्यारा, (🍲)
सबका होता है गुजारा। (🍚)
गरीब-अमीर सब एक, (🫂)
सेवा का भाव रहा नेक। (🤲)

06
मेला है रंगीन लगा, (🎪)
हर मन उत्साह से जगा। (🎠)
संस्कृति का दर्शन करा, (🎭)
उरूस ने मन को हरा-भरा करा। (🌱)

07 नेक राह पर चलना है, (🛣�)
बाबा का संदेश फले। (🎯)
'गैबी पीर' का यह उरूस, (🌟)
जीवन में भर दे नया रस। (💖)

हमें नेक (अच्छे) रास्ते पर चलना है,
और बाबा का संदेश सफल हो।
'गैबी पीर' का यह उर्स,
हमारे जीवन में नया आनंद और उत्साह भर दे।

--अतुल परब
--दिनांक-26.10.2025-रविवार.
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