अराजकता का सरल सत्य-

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 11:58:55 AM

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Atul Kaviraje

अराजकतावाद इस अवलोकन पर आधारित है कि चूँकि बहुत कम लोग स्वयं पर शासन करने के लिए पर्याप्त बुद्धिमान होते हैं, इसलिए और भी कम लोग दूसरों पर शासन करने के लिए पर्याप्त बुद्धिमान होते हैं।
-एबे, एडवर्ड - अमेरिकी कट्टरपंथी पर्यावरणविद् (1927 - 1989)

अराजकता का सरल सत्य (The Anarchist's Simple Truth)

चरण १
एक सरल सत्य अराजकतावादी साफ़ जाने,
कि बुद्धि की रौशनी कुछ के ही पास पहचाने.
स्वयं पर शासन करना, एक कठिन चुनौती,
एक अनमोल पहरा जिसे बस विद्वान ही ढोती.

चरण २
अगर अपने मन को, इस जंगली, बेचैन हृदय को,
नियंत्रित करना है एक सूक्ष्म, कुशल अभिनय को,
तो हम कैसे करें भरोसा, एक छोटे, चुने हुए दल पर,
जो जनसमूह को चलाए, उनके हर निर्णय और बल पर?

चरण ३
दी गई शक्ति, एक भारी, लुभावनी चीज़,
जो सर्वोत्तम गुणों को भी कर देती है मरीज़.
एक का या तानाशाह का राज, जब आता है सामने,
यह छीन लेता है आज़ादी जो थी इस पूरे वतन के नामे.

चरण ४
क्योंकि वे जो दूसरों की आत्मा पर प्रभुत्व चाहें,
अक्सर बस स्वार्थी लक्ष्यों की ओर ही तो जाएँ.
वे लोगों को नहीं देखते मित्र या समकक्ष के रूप में,
बल्कि साधन समझते, अपनी भय को शांत करने के कूप में.

चरण ५
तो अराजकता नहीं है कोई क्रोधित तूफ़ान,
बल्कि यह सच्चे रूप में व्यवस्था की पहचान.
जहाँ हर कोई अपने क्षेत्र में राजा और प्रजा है,
और मालिकों का डर बस हवा में यूँ ही फ़ना है.

चरण ६
राज्य की वह महान संरचना, ऊँचे आदेशों पर बनी,
बस ताकत चुरा लेती है, आम हाथों में जो छिपी.
यह निर्भरता बढ़ाती है, मंद करती है दिमाग को,
आज़ाद, सच्ची आत्मा को छोड़ देती बहुत पीछे के भाग को.

चरण ७
जहाँ लोग वास्तव में स्वतंत्र हैं, वहाँ ज्ञान को बढ़ने दो,
अपना मार्ग, अपनी सत्ता, उन्हें ख़ुद ही चुनने दो.
क्योंकि अगर कम लोग खुद को जानते, जैसा एब्बी ने कहा,
तो उनसे भी कम करें नेतृत्व, जहाँ वे चलाए गए, बस रहा.

--अतुल परब
--दिनांक-26.10.2025-रविवार.
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