जागृति का प्रारंभ-

Started by Atul Kaviraje, October 27, 2025, 12:02:14 PM

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Atul Kaviraje

"जागृति तब शुरू होती है जब एक व्यक्ति को यह एहसास होता है कि वह कहीं नहीं जा रहा है और उसे नहीं पता कि कहाँ जाना है।"
-जी.आई.गुरजिएफ-जॉर्ज इवानोविच गुरजिएफ-ग्रीको-अर्मेनियाई रहस्यवादी और दार्शनिक।

जी.आई. गुरजिएफ का यह गहन उद्धरण — "जागृति तब शुरू होती है जब एक व्यक्ति को यह एहसास होता है कि वह कहीं नहीं जा रहा है और उसे नहीं पता कि कहाँ जाना है।" — ईमानदार आत्म-सामना के एक महत्वपूर्ण क्षण को दर्शाता है जो आंतरिक कार्य का सच्चा प्रारंभिक बिंदु है।

जागृति का प्रारंभ (Jāgṛti Kā Prārambh)

चरण १
राह आगे की लगी स्पष्ट और लंबी,
मैं चला नींद में, भय को दबाकर दंभी।
हजारों कदम, एक तेज चाल थी मेरी,
पर समय या जगह में न दिखी कोई फेरी।

चरण २
फिर आया ठहराव, अचानक दहशत छाई,
एक खाली राह सामने थी फैलाई।
देखा पीछे जो निशान मैंने बनाए,
एक थकी आत्मा, धोखा खाई, घबराए।

चरण ३
"मैं कहीं नहीं जा रहा," यही थी पुकार,
विशाल, खाली आकाश के नीचे संसार।
बाहरी लक्ष्य था एक मायावी तलाश,
एक आंतरिक शून्य, जहाँ सत्य का प्रकाश।

चरण ४
"मुझे नहीं पता किस ओर मुड़कर जाऊँ,"
वे मार्गदर्शक नक़्शे अब जलने लगे, हाऊँ।
उधार लिया ज्ञान, अब बन गया धूल,
जिसने चुप्पी और अविश्वास का लिया मूल।

चरण ५
यह एकमात्र सच, नग्न, सीधा और बोल्ड,
एक कहानी जिसे अब होना है अनफोल्ड।
दावा करने को कोई झूठी दिशा न बाकी,
मैं इस कमी को अपनाता हूँ, बात है साकी।

चरण ६
यह ही शून्य, यह ही ईमानदार विराम,
जो उच्च नियमों से करता अपना काम।
क्योंकि जब झूठा रास्ता ख़त्म होता है,
तब एक गहरा भीतरी सफर शुरू होता है।

चरण ७
बस स्थिर खड़ा होना, निश्चल, आज़ाद,
यहीं से 'स्व' (Self) होने लगता है आबाद।
जागृति का प्रारंभ तो यहीं से होता है,
जब कहीं न हो राह, 'स्व' पास होता है।

--अतुल परब
--दिनांक-26.10.2025-रविवार.
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