🌸 हिंदी कविता: 'शंकर रसाळ गुरुवर' 🌸

Started by Atul Kaviraje, October 28, 2025, 11:41:27 AM

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Atul Kaviraje

🌟 समर्थ सद्गुरु शंकर महाराज रसाळ पुण्यतिथि, जेऊर: भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का पर्व 🌺

'संपलेसे वाटे अवतार कार्य म्हणवूनी काय त्वरा केली'

🌸 हिंदी कविता: 'शंकर रसाळ गुरुवर' 🌸

01
कार्तिक की षष्ठी आई है, (🗓�)
गुरु की याद मन में छाई है। (🙏)
जेऊर की पावन भूमि पर, (🚩)
संत-वाणी गूँजी घर-घर। (🏡)

अर्थ:
कार्तिक मास की षष्ठी तिथि आई है, गुरु शंकर महाराज की याद मन में व्याप्त है। जेऊर की पवित्र धरती पर, संत के उपदेश हर घर में गूँज रहे हैं।

02
शंकर रसाळ नाम तेरा, (👑)
किया जीवन सफल मेरा। (💡)
भजन, कीर्तन का दिया मार्ग, (🎶)
मिटा दिए सब दुःख और दाग। (✨)

अर्थ:
हे गुरुवर! शंकर रसाळ आपका नाम है, आपने मेरा जीवन सफल कर दिया। आपने भजन और कीर्तन का मार्ग दिखाया, और जीवन के सभी दुःख और दोष मिटा दिए।

03
तुका की गाथा का पारायण, (📜)
शुद्ध करता है यह मन। (📖)
मोक्ष-मार्ग का यही सार, (🔑)
गुरु-कृपा से मिले आधार। (🙇)

अर्थ:
संत तुकाराम महाराज की गाथा का पाठ इस मन को शुद्ध करता है। मोक्ष के मार्ग का यही सार है, गुरु की कृपा से ही हमें आधार मिलता है।

04
समाधि मंदिर है न्यारा, (🔔)
भक्तों को मिले सुख सारा। (💖)
पांडुरंग गुरुवर हैं आगे, (🚀)
गुरु-कार्य का दीपक जागे। (🕯�)

अर्थ:
समाधि मंदिर बहुत ही अनोखा है, जहाँ भक्तों को सारा सुख मिलता है। पांडुरंग महाराज गुरु-कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं, गुरु-कार्य का दीपक निरंतर जल रहा है।

05
महाप्रसाद का भंडारा, (🍲)
भूखों को मिले सहारा। (🍚)
जात-पात का भेद नहीं, (🤝)
गुरु-सेवा से सुख यहीं। (😇)

अर्थ:
महाप्रसाद का विशाल भंडारा लगा है, जहाँ भूखे लोगों को सहारा मिलता है। यहाँ जात-पात का कोई भेद नहीं है, गुरु की सेवा से ही सुख प्राप्त होता है।

06
कीर्तनकार वचन सुनाएँ, (🗣�)
जीवन का अर्थ समझाएँ। (🎤)
अज्ञान की रात दूर कर, (🌟)
भर दें भक्ति का नया सुर। (🎼)

अर्थ:
कीर्तनकार वचन सुनाते हैं, और जीवन का सही अर्थ समझाते हैं। वे अज्ञान की रात को दूर करके, भक्ति का नया स्वर भर देते हैं।

07
आज गुरु-स्मरण का दिन है, (🕰�)
प्रभु-प्रेम में सब लीन हैं। (🕊�)
उनकी शिक्षा को अपनाएँ, (🎯)
परमार्थ का सुख हम पाएँ। (🌺)

अर्थ:
आज गुरु के स्मरण का दिन है, सभी प्रभु के प्रेम में लीन हैं। उनकी शिक्षाओं को अपनाकर हम परमार्थ का सुख प्राप्त करें।

--अतुल परब
--दिनांक-27.10.2025-सोमवार. 
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