कान्हा की नज़र और ग्वालिन की चतुराई 🥛👀-

Started by Atul Kaviraje, October 28, 2025, 12:27:12 PM

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Atul Kaviraje

कान्हा की नज़र और ग्वालिन की चतुराई 🥛👀

पहला पद:
दूध का बर्तन छुपा कर रखा, 🥛🙈
गवाला पूछे, ऐसा क्यों किया? 🤔
"ग्वालिन" कानाफूसी की, ग्वाले के कान में, 👂
"कृष्ण" की मुझ पर नज़र पड़ी थी। 💖
अर्थ: ग्वालिन ने दूध का बर्तन छुपा कर रख दिया। ग्वाले ने उससे पूछा, "तुमने ऐसा क्यों किया?" ग्वालिन ने ग्वाले के कान में फुसफुसाते हुए कहा कि, "कृष्ण की मुझ पर नज़र पड़ गई थी।"

दूसरा पद:
सुबह होते ही, कान्हा उठे, ☀️👶
दूध-दही के लिए, शरारतें करने उठे। mischievous 😜
ग्वालिनों के रास्ते में, वो खड़ा रहे, 🧍�♂️
मक्खन चुराए, और भाग जाए। 🏃�♂️💨
अर्थ: सुबह होते ही कान्हा उठता है, और दूध-दही के लिए शरारतें करने लगता है। वह ग्वालिनों के रास्ते में खड़ा हो जाता है, मक्खन चुराता है और भाग जाता है।

तीसरा पद:
मुरली बजाए, मन मोह ले, 🎶🥰
सभी गोपियों को, पास बुलाए। 👯�♀️
उसकी बांसुरी का, नाद कान में पड़े, 👂
अपने आप ही कदम, उसकी ओर मुड़ें। 👣
अर्थ: कृष्ण मुरली बजाता है और सभी का मन मोह लेता है। वह सभी गोपियों को अपने पास बुलाता है। उसकी बांसुरी की धुन कान में पड़ते ही, अपने आप ही कदम उसकी ओर मुड़ जाते हैं।

चौथा पद:
कभी मटकी फोड़े, कभी दही खाए, 🏺💥
कभी शरारत से, ग्वालिनों को सताए। 😠
यशोदा डाँटे, फिर भी वो हंसे, 😂
उसकी शरारतों में भी, प्रेम ही बसे। 💖
अर्थ: वह कभी मटकी फोड़ता है तो कभी दही खाता है। कभी शरारत करके ग्वालिनों को परेशान करता है। यशोदा उसे डाँटती है, फिर भी वह हँसता है, क्योंकि उसकी शरारतों में भी प्रेम ही छिपा होता है।

पांचवां पद:
ग्वालिन कहे, क्या करूँ अब, 🤷�♀️
इस नटखट बच्चे की, कितनी सुनाऊँ गाथा। 📜
छुपा कर रखा, भले ही सारा दूध, 🥛
कृष्ण की नज़र से, वो भी ना छूटा। 👀
अर्थ: ग्वालिन कहती है, "अब मैं क्या करूँ? इस नटखट बच्चे की कितनी कहानियाँ बताऊँ?" वह बताती है कि, "मैंने भले ही सारा दूध छुपा कर रखा था, फिर भी कृष्ण की तेज़ नज़र से वह भी नहीं बच पाया।"

छठा पद:
यही तो लीला, कान्हा की न्यारी, ✨
प्रेम से भरी हुई, सबको प्यारी। 🥰
फोड़ता है मटकियाँ, फिर भी मन हंसे, 😂
उसके अस्तित्व से, गोकुल बसे। 🏡
अर्थ: यही तो कान्हा की अनोखी लीला है, जो प्रेम से भरी हुई है और सभी को प्यारी है। वह मटकियाँ फोड़ता है, फिर भी मन हँसता है, क्योंकि उसके अस्तित्व से ही गोकुल जीवंत होता है।

सातवाँ पद:
इन शरारतों से, प्रेम बढ़े, 📈
भक्ति की सुगंध, चारों ओर उड़े। 👃
कान्हा की कृपा से, जीवन सरे, 🌈
उसके चरणों में, भक्ति ही भरे। 🙏
अर्थ: इन शरारतों से ही प्रेम बढ़ता है और भक्ति की सुगंध चारों ओर फैलती है। कान्हा की कृपा से जीवन सफल होता है और उसके चरणों में भक्ति दृढ़ होती है।

--अतुल परब
--दिनांक-27.10.2025-सोमवार. 
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