"शुभ संध्या, मंगलवार मुबारक हो"-गोधूलि बेला में चाय का प्रतिबिंब ☕️🌙

Started by Atul Kaviraje, October 28, 2025, 09:02:11 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ संध्या, मंगलवार मुबारक हो"

शाम ढलते ही खिड़की के पास चाय की चुस्कियाँ लेता एक व्यक्ति

गोधूलि बेला में चाय का प्रतिबिंब ☕️🌙

(शाम ढलने पर खिड़की के पास चाय पीता हुआ एक व्यक्ति)

शीर्षक: गोधूलि चाय का चिंतन ☕️🌙

चरण १
सूरज नीचे है, एक फीका पड़ता प्रकाश,
जैसे ही दिन रात के हवाले होता है। 🌅
एक खिड़की का फ्रेम दृश्य को थामे है,
आसमान सोने से नीले में बदलता हुआ। 💙

चरण २
एक भाप निकलता कप, एक शांत हाथ,
पूरे देश में शाम की शांति। ☕️
चाय की गर्म महक, एक कोमल पुकार,
भाग-दौड़ रोककर दीवारों को गिरने देने के लिए। 😌

चरण ३
गहरा तरल (चाय), एक आरामदायक रंग,
करने के लिए एक सरल, सुखदायक कार्य। 🍵
घूंट धीमी हैं, विचार गहरे हैं,
जबकि जल्दबाज़ी वाला शहर सोने लगता है। 🤫

चरण ४
काँच अंदर की चमक को दर्शाता है,
धीरे और कम जलते अंगारों की तरह। 🔥
शांत मरम्मत का एक क्षण,
हवा में पकड़ी गई चिंताओं को दूर करता है। ✨

चरण ५
परछाइयाँ फैलती हैं और चौड़ी होती हैं,
जहाँ व्यस्त विचार सुरक्षित रूप से छिप सकते हैं। 🧠
हम रोशनी को चमकना शुरू करते हुए देखते हैं,
जैसे सपने से निकलते हुए तारे। 🌟

चरण ६
होठों से आत्मा तक गर्मी उतरती है,
आंतरिक अस्तित्व को पूरा करने के लिए। 💖
एक शांत कृतज्ञता भेजी जाती है,
उस समय के लिए, जो शांति से, पूरी तरह व्यतीत हुआ। 🙏

चरण ७
आखिरी गर्म घूंट, शाम हो चुकी,
एक शांत जीत हासिल हुई है। 💡
खिड़की बाहर के अंधेरे को थामे रखती है,
जबकि आंतरिक शांति सवार होने लगती है। 🕊�

--अतुल परब
--दिनांक-28.10.2025-मंगळवार.
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