📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-६३-क्रोध का उदय 😡🔥

Started by Atul Kaviraje, October 29, 2025, 10:18:01 AM

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Atul Kaviraje

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-६३-

क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥ २‑६३॥

🌺 हिंदी भावकाव्य (दीर्घ)
कविता १: क्रोध का उदय 😡🔥

जब मन में क्रोध उठे, जल उठे अग्निज्वाला,
विवेक की दीपशिखा हो जाए फिर काला।
जब मन में क्रोध उठे, जल उठे अग्निज्वाला,
विवेक की दीपशिखा हो जाए फिर काला॥
(अर्थ: जैसे ही मन में क्रोध उत्पन्न होता है, विवेक की ज्योति बुझ जाती है।)

कविता २: मोह का जाल 😵�💫🌌

क्रोध से फिर छा जाता है 'मोह' का अँधियारा,
ज्ञान का दीप मंद पड़े, न दिखे मार्ग हमारा।
क्रोध से फिर छा जाता है 'मोह' का अँधियारा,
ज्ञान का दीप मंद पड़े, न दिखे मार्ग हमारा॥
(अर्थ: क्रोध से मोह उत्पन्न होता है, जिससे ज्ञान का प्रकाश मंद हो जाता है।)

कविता ३: स्मृति का भ्रम 🧠❌

मोह से होती स्मृति में गहरी उलझन,
धर्म और अधर्म का मिट जाता भेदन।
मोह से होती स्मृति में गहरी उलझन,
धर्म और अधर्म का मिट जाता भेदन॥
(अर्थ: मोह से स्मृति भ्रमित हो जाती है और सही-गलत की समझ लुप्त हो जाती है।)

कविता ४: स्मृति भ्रंश का दुख 🤔📉

स्मृति भ्रमित हुई तो दिशा कोई न सूझे,
कर्तव्य छूट जाए, जीवन तम में डूबे।
स्मृति भ्रमित हुई तो दिशा कोई न सूझे,
कर्तव्य छूट जाए, जीवन तम में डूबे॥
(अर्थ: स्मृति भ्रष्ट होने से जीवन का सही मार्ग खो जाता है।)

कविता ५: बुद्धि का विनाश 💡💔

स्मृति के भ्रम से बुद्धि का होता अंत,
निर्णयशक्ति खो जाए, मिटे आत्मसंत।
स्मृति के भ्रम से बुद्धि का होता अंत,
निर्णयशक्ति खो जाए, मिटे आत्मसंत॥
(अर्थ: जब स्मृति भ्रष्ट हो जाती है, तो बुद्धि नष्ट होकर निर्णय की शक्ति समाप्त हो जाती है।)

कविता ६: पूर्ण पतन ⚓️↘️

जब बुद्धि नष्ट हो जाए, जीवन हो अधोगति,
स्वयं से बिछुड़ जाए, मिट जाए आत्मशक्ति।
जब बुद्धि नष्ट हो जाए, जीवन हो अधोगति,
स्वयं से बिछुड़ जाए, मिट जाए आत्मशक्ति॥
(अर्थ: बुद्धि के नाश से मनुष्य का नैतिक और आध्यात्मिक पतन होता है।)

कविता ७: भगवान का उपदेश 🙏🕊�

हे मानव! क्रोध को तू त्याग दे निरंतर,
स्थिर बुद्धि रख, यही है जीवन का मंतर।
हे मानव! क्रोध को तू त्याग दे निरंतर,
स्थिर बुद्धि रख, यही है जीवन का मंतर॥
(अर्थ: इसलिए, हे मनुष्य! क्रोध का त्याग कर, शांत और स्थिर बुद्धि से जीवन जी।)

✨ इमोजी सारांश (Emoji सारांश)

क्रोध 😡 → संमोह (मोह, विवेकनाश) 😵�💫 →
स्मृतिभ्रम 🧠❌ → बुद्धिनाश 💡💔 →
प्रणश्यति (पूर्ण पतन) ⚓️⬇️

--अतुल परब
--दिनांक-28.10.2025-मंगळवार.
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