गुरुद्वादशी: गुरु-तत्व और समर्पण का पावन पर्व1-पादुका 👣, मंत्र जाप 📿 | भाव:

Started by Atul Kaviraje, October 29, 2025, 10:56:20 AM

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Atul Kaviraje

गुरुद्वादशी-

18 अक्टूबर 2025 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरम्भ हो रहा है, और उससे ठीक पहले अश्विनी कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि समाप्त हो रही है। दत्त संप्रदाय में, अश्विन वद्य द्वादशी को 'गुरुद्वादशी' (श्रीपाद श्रीवल्लभ निजानंद गमन दिवस) के रूप में मनाया जाता है। अतः, इस लेख में इसी धार्मिक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया है, क्योंकि यह तिथि दिवाली के आरंभिक दिनों में पड़ती है।

हिंदी लेख - गुरुद्वादशी: गुरु-तत्व और समर्पण का पावन पर्व

दिनांक: 18 अक्टूबर, 2025 - शनिवार

गुरुद्वादशी (अश्विन कृष्ण द्वादशी) भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, विशेषकर दत्त संप्रदाय 🕉� में अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस है। यह वह पावन तिथि है, जब भगवान दत्तात्रेय के प्रथम अवतार श्रीपाद श्रीवल्लभ स्वामी ने कुरवपुर में निजानंद गमन (स्थूल देह त्यागकर अदृश्य होना) किया था। यह दिन शिष्य और साधकों के लिए गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण 🙏, कृतज्ञता और गुरु-तत्व की अनुभूति का महापर्व है। यह दीपावली के उत्सव (वसुबारस/गोवत्स द्वादशी) से जुड़ा हुआ है।

लेख का विवेचनपरक और विस्तृत विवरण (10 प्रमुख बिंदु)

1. गुरुद्वादशी का मौलिक अर्थ और महत्त्व 🌟

तिथि: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि। (प्रतीक: 12वीं तिथि 📅)

अर्थ: 'गुरु' (आध्यात्मिक शिक्षक) और 'द्वादशी' (बारहवीं तिथि)। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा में गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा को दर्शाता है।

गुरु-तत्व की प्रचुरता: मान्यता है कि इस दिन ब्रह्मांड में गुरु-तत्व 🧘�♂️ का १०० गुना अधिक प्रक्षेपण होता है, जिससे साधकों को गुरु की कृपा आसानी से प्राप्त होती है।

2. श्रीपाद श्रीवल्लभ स्वामी का निजानंद गमन ✨

प्रथम दत्तावतार: श्रीपाद श्रीवल्लभ भगवान दत्तात्रेय के पहले अवतार थे, जिनका कार्यकाल 30 वर्ष का था।

दिव्य लीला: उन्होंने कुरवपुर क्षेत्र में अनेक अद्भुत लीलाएँ कीं और समाज को ज्ञान तथा भक्ति का मार्ग दिखाया।

निजानंद गमन: इसी तिथि पर उन्होंने अपने देह का त्याग न करते हुए, कुरवपुर में अदृश्य रूप में निजानंद गमन किया। आज भी मान्यता है कि वे अपने भक्तों के उद्धार के लिए उसी रूप में कार्यरत हैं। (प्रतीक: दत्त पादुका 👣)

3. गुरुद्वादशी और दत्तात्रेय परंपरा 🚩

गुरुचरित्र का आधार: श्रीपाद श्रीवल्लभ के अद्भुत चरित्र का वर्णन श्री गुरुचरित्र ग्रंथ में मिलता है, जो दत्त संप्रदाय का आधारभूत ग्रंथ है।

नरसिंह सरस्वती महाराज: इस दिन का महत्व इसलिए भी है कि यह दत्तात्रेय के द्वितीय अवतार श्री नरसिंह सरस्वती महाराज द्वारा स्थापित मनोहर पादुका 👣 की स्थापना और गाणगापुर प्रस्थान से जुड़ा है।

गुरु ही त्रिमूर्ति: दत्त संप्रदाय में गुरु को ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त रूप माना जाता है। (प्रतीक: त्रिमूर्ति 🙏)

4. गुरुद्वादशी की पूजा विधि और अनुष्ठान 📿

शुद्धता और संकल्प: प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और गुरु पूजा का संकल्प लें।

गुरु पूजन: गुरु के चित्र, मूर्ति या पादुकाओं 👣 को एक चौकी पर स्थापित करें। उन्हें रोली, चंदन, पुष्पमाला 🌸 और दक्षिणा अर्पित करें।

विशेष भोग: इस दिन खीर या सफेद मिष्ठान का भोग लगाया जाता है, जिसे सभी शिष्यों और भक्तों में वितरित किया जाता है।

5. गुरु-मंत्र जाप और स्तुति 🎶

मंत्र: गुरुद्वादशी पर गुरु मंत्र, जैसे "श्रीपाद राजम् शरणम् प्रपद्ये" या "दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा" का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।

गुरुचरित्र पाठ: इस दिन श्री गुरुचरित्र का पाठ (विशेषकर 9वाँ अध्याय) या गुरु स्तुति करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

ध्यान: गुरु के चरण कमलों का ध्यान कर उनसे ज्ञान और आशीर्वाद 🤲 की याचना की जाती है।

इमोजी सारांश (Emoji Summary)

पर्व: गुरुद्वादशी 🙏 | तिथि: 18 अक्टूबर 📅 | गुरु: श्रीपाद श्रीवल्लभ 🌟 | दत्त: त्रिमूर्ति 🕉� | पूजन: पादुका 👣, मंत्र जाप 📿 | भाव: समर्पण 💖, कृतज्ञता 🙌 | महत्त्व: गुरु-तत्व वृद्धि 💯, ज्ञान 💡 | संयोग: वसुबारस 🐄 | सन्देश: गुरु कृपा ही मोक्ष है। 🛐

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-18.10.2025-शनिवार.
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