🪔 श्री धन्वंतरी जयंती: स्वास्थ्य और समृद्धि का अमृत पर्व 🪔-1-

Started by Atul Kaviraje, October 29, 2025, 10:57:35 AM

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Atul Kaviraje

श्री धन्वंतरी जयंती-

🪔 श्री धन्वंतरी जयंती: स्वास्थ्य और समृद्धि का अमृत पर्व 🪔-

दिनांक: 18 अक्टूबर, 2025 - शनिवार

भूमिका
18 अक्टूबर 2025 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरम्भ हो रहा है, जिसे 'धनतेरस' या 'धनत्रयोदशी' के नाम से जाना जाता है। इसी दिन, समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि, जो आयुर्वेद के जनक हैं, अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। अतः, इस लेख में इसी धार्मिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

🎉 धन्वंतरि जयंती: आरोग्य और धन का पर्व

श्री धन्वंतरि जयंती 🎉, जिसे धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली के पाँच दिवसीय महापर्व का प्रथम दिवस है। यह दिन न केवल धन की देवी माँ लक्ष्मी 💵 और धन के देवता कुबेर के पूजन के लिए समर्पित है, बल्कि यह विशेष रूप से स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वंतरि ⚕️ के प्राकट्य का उत्सव है, जो अपने हाथ में अमृत कलश लेकर आए थे। यह पर्व हमें सिखाता है कि 'पहला सुख निरोगी काया' है, और स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।

लेख का विवेचनपरक और विस्तृत विवरण (10 प्रमुख बिंदु)

1. धन्वंतरी जयंती का उद्गम और पौराणिक कथा 🌊

समुद्र मंथन: यह जयंती उस शुभ घड़ी को चिह्नित करती है, जब कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को क्षीर सागर के मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश 🏺 लेकर प्रकट हुए थे।

विष्णु का अंश: धन्वंतरि को भगवान विष्णु का सोलहवाँ अंश अवतार माना जाता है। उनका प्राकट्य रोगों और मृत्यु से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से हुआ था।

आरोग्य के दाता: उन्होंने ही संसार को आयुर्वेद का ज्ञान दिया, इसलिए उन्हें आयुर्वेद के जनक 🌿 और देवताओं का चिकित्सक (देव वैद्य) कहा जाता है।

2. धन्वंतरि स्वरूप और प्रतीक 🌟

चतुर्भुज रूप: भगवान धन्वंतरि का स्वरूप मनोहारी है। वे चतुर्भुज (चार भुजाओं वाले) हैं, जिनके हाथों में अमृत कलश 🏺, शंख 🐚, चक्र ☸️, और जड़ी-बूटियाँ (या जलौका) होती हैं।

पीली आभा: उनका शरीर पीली आभा से युक्त होता है और वे पीले वस्त्र धारण करते हैं, जो आरोग्यता और शुद्धता का प्रतीक है।

आयुर्वेद का प्रतीक: हाथ में स्थित कलश अमृत, दीर्घायु, और स्वास्थ्य का प्रतीक है, जो जीवन के परम लक्ष्य को दर्शाता है।

3. धन्वंतरी जयंती और धनतेरस का संबंध ⚖️

स्वास्थ्य और धन: इस दिन धन्वंतरि की पूजा से व्यक्ति निरोगी होता है (आरोग्य धन), जिससे वह धन कमाने और उसका उपभोग करने में सक्षम होता है।

वस्तु क्रय की परंपरा: धनतेरस पर नए बर्तन, सोना, चाँदी या धातु 🔑 खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि अमृत कलश एक धातु (पीतल/तांबा) के पात्र में था। यह क्रय 'तेरह गुना' समृद्धि का प्रतीक है।

यम दीप दान: त्रयोदशी तिथि को यमराज 🕯� के निमित्त दीप दान करने की भी परंपरा है, जिससे अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, यह भी आरोग्य की कामना का ही विस्तार है।

4. धन्वंतरि पूजन की विधि और शुभ मुहूर्त 📿

शुभ काल: धनतेरस की पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में करना सबसे शुभ माना जाता है। (प्रतीक: संध्या 🌇)

स्थापन: भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या चित्र को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें।

षोडशोपचार पूजा: उन्हें रोली, अक्षत, पीले फूल 🌼, चंदन, धूप, दीप अर्पित करें। विशेष रूप से उन्हें तुलसी दल 🍃 और गाय का दूध/मक्खन का भोग लगाया जाता है।

5. विशेष मंत्र और स्तुति का जाप 🕉�

आरोग्य मंत्र: अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए इस दिन धन्वंतरि मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए:
👉 "ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः"

धन्वंतरि स्तोत्र/चालीसा: इस दिन धन्वंतरि स्तोत्र या चालीसा का पाठ करने से रोग-शोक दूर होते हैं और आय-सौभाग्य में वृद्धि होती है।

ध्यान: पूजा के समय अपना मुख ईशान (उत्तर-पूर्व), पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-18.10.2025-शनिवार.
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