यम दीपदान- ✨1-

Started by Atul Kaviraje, October 29, 2025, 10:58:56 AM

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Atul Kaviraje

यम दीपदान-

✨ हिन्दी लेख (HINDI LEKH) - यम दीपदान

भक्ति भाव पूर्ण, विवेचनपरक एवं विस्तृत लेख

यम दीपदान, जिसे यमराज के लिए दीपदान भी कहा जाता है, दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (धनतेरस) के दिन प्रदोष काल में किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य परिवार को अकाल मृत्यु के भय से मुक्त करना और उन्हें स्वस्थ, समृद्ध जीवन प्रदान करना है।

1. यम दीपदान का पौराणिक महत्व एवं कथा 📜

(a) अकाल मृत्यु से मुक्ति का वरदान:
धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर पद्मपुराण और स्कंद पुराण में यम दीपदान का उल्लेख है।
एक प्राचीन कथा के अनुसार, यमदूतों ने यमराज से पूछा:
"क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे प्राणी अकाल मृत्यु से बच सकें?"
तब यमराज ने कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को दीपदान का विधान बताया।

(b) राजा हिम और पुत्र की कथा (उदाहरण):
राजा हिम के पुत्र की विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था।
उसकी पत्नी ने रात में महल के द्वार पर सोने-चाँदी के आभूषणों और सिक्कों का ढेर लगाया और दीपों की शृंखला जलाई।
जब सर्प रूपी यमदूत आए, तो दीपों के तेज से उनकी आँखें चौंधिया गईं और वे लौट गए।
सुबह पति-पत्नी ने यमराज से प्रार्थना की।
तभी से यह परंपरा बनी कि जो इस दिन यमराज के नाम दीपदान करता है, उसे अकाल मृत्यु नहीं सताती।

👸👑🐍🕯�

2. दीपदान का समय (शुभ मुहूर्त) 📅

(a) प्रदोष काल का महत्व:
यह सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे की अवधि होती है, जो देव पूजा और दीपदान के लिए सर्वोत्तम है।

(b) 2025 का शुभ मुहूर्त:
👉 18 अक्टूबर 2025 को
🕯� शाम 5:48 बजे से 7:04 बजे तक (1 घंटा 16 मिनट)
इस अवधि में यम दीपदान करना सर्वोत्तम है।

3. यम दीपदान की विधि और सामग्री 🛠�

(a) दीपक की तैयारी:

एक चौमुखी दीपक (चार मुखों वाला) या बड़ा मिट्टी का दीपक लें।

उसमें सरसों का तेल भरें।

चार रूई की बत्तियाँ लगाएँ।

(b) दीप में विशेष सामग्री:

तिल के तेल के साथ-साथ

एक कौड़ी 🐚

एक सिक्का 🪙 डालें।
💡 मान्यता है कि इससे धन और समृद्धि आकर्षित होती है।

(c) पूजन और संकल्प:
दीप प्रज्वलन से पहले उसे

गंध, पुष्प, अक्षत से पूजें।

फिर परिवार की दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा का संकल्प लें।

4. दीपक रखने की दिशा और स्थान 🧭

(a) दक्षिण दिशा:
यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी हैं।
दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें।

(b) दीपक रखने का आसन:

दीपक को सीधे ज़मीन पर नहीं रखें।

गेहूँ या चावल का ढेर बनाकर उस पर रखें। 🌾

(c) अन्य दीपक:

इस दिन माँ लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि के लिए भी घी के दीप जलाए जाते हैं।

परंतु यम दीपक विशेष होता है, इसे अलग रखें।

5. दीपदान का मंत्र और पाठ 🕉�

🔥 यमराज को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करें:

"मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह,
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥"

अर्थ:
त्रयोदशी को दीपदान से पाश और दंड धारण करने वाले,
काल और श्यामा के साथ रहने वाले सूर्यपुत्र यमराज मुझ पर प्रसन्न हों।

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-18.10.2025-शनिवार.
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