संत सेना महाराज-“श्रीरामानंद रघुनाथ ज्यो दुतिय सेतु जगतरण कियो-भक्ति का सेतु-

Started by Atul Kaviraje, October 30, 2025, 10:45:11 AM

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Atul Kaviraje

        संत सेना महाराज-

"श्रीरामानंद रघुनाथ ज्यो दुतिय सेतु जगतरण कियो।

अनंतानंद, कबिर, सुखा, सुरसुरा पद्मावती, नरहरी।

पीपा भवानंद रैदास धना सेना सुरसुरा की नरहरी।

औरी शिष्य प्रशिष्य एकसे एक अजागर।"

📜 मूल पद (Original Hindi Pad): "श्रीरामानंद रघुनाथ ज्यो दुतिय सेतु जगतरण कियो। अनंतानंद, कबिर, सुखा, सुरसुरा पद्मावती, नरहरी। पीपा भवानंद रैदास धना सेना सुरसुरा की नरहरी। औरी शिष्य प्रशिष्य एकसे एक अजागर।"

⭐ पद का संक्षिप्त अर्थ (Meaning) : स्वामी रामानंद ने प्रभु रामचंद्र के समान ही, संसार को तारने वाला दूसरा भक्ति का सेतु (पुल) बनाया। उनके शिष्य-परिवार में अनंतानंद, कबीर, पद्मावती, रैदास, धना, सेना जैसे महान संत हुए, जो एक से बढ़कर एक तेजस्वी थे।

७ कडवों की हिंदी कविता: भक्ति का सेतु

📜 गुरु-राम की महिमा-काव्य 🙏

(संत श्री रामानंद स्वामी और उनके शिष्य परंपरा पर आधारित काव्य)

कडवा १: गुरु-राम की महिमा 🙏

श्री रामानंद स्वामी हैं महान,
जैसे रघुपति का पुल का निर्माण।
जगतरण को धनुष लिया हाथ,
भक्ति का द्वितीय सेतु बनाया साथ।

(अर्थ: जगतरण = संसार को तारने वाला। द्वितीय सेतु = दूसरा पुल.)

कडवा २: प्रमुख शिष्य पहले 🧘�♂️

अनंतानंद जपे नाम को,
कबीर जुलाहा करे काम को।
सुखानंद और सुरसुरा ज्ञानी,
गुरु की वाणी की उनकी कहानी।

(अर्थ: अनंतानंद, कबिर, सुखा, सुरसुरा = स्वामी रामानंद के प्रमुख शिष्य.)

कडवा ३: भक्त नारी का स्थान 👸

पद्मावती थीं साध्वी नारी,
भक्ति-मार्ग पर कीर्ति भारी।
नरहरी सुनार का काम करते,
पर मन से प्रभु में ही बसते।

(अर्थ: पद्मावती = रामानंद की शिष्या. नरहरी = सुनार का काम करने वाले.)

कडवा ४: समता की कहानी 🧑�🤝�🧑

पीपा थे राजा, धना थे जाट,
छोड़ दिया उन्होंने जाति का बाट।
भवानंद भी संत अति श्रेष्ठ,
भक्ति में भेद नहीं, ये ज्ञान है स्पष्ट।

(अर्थ: पीपा = राजा पीपा. धना = जाट जाति के किसान संत.)

कडवा ५: सेना और रैदास ✂️🔨

रैदास चर्मकार, मिले उच्च स्थान,
सेना नाई को मिला प्रभु का सम्मान।
सभी व्यवसायी एक साथ आए,
गुरु-चरणों में उन्होंने आश्रय पाए।

(अर्थ: रैदास = संत रविदास/रैदास. सेना = संत सेना महाराज (नाई).)

कडवा ६: परंपरा का विस्तार 🔆

शिष्य हुए, फिर प्रशिष्य भी हुए,
तेजस्वी अजागर उन्होंने मार्ग चुने।
एक से बढ़कर एक महान सारे,
भक्ति-ज्ञान फैलाया जग-किनारे।

(अर्थ: प्रशिष्य = शिष्यों के शिष्य। अजागर = तेजस्वी, जागृत.)

कडवा ७: निष्कर्ष का संदेश 🔑

गुरु रामानंद, भक्ति की महान ज्योति,
जिन्होंने प्रेम रस की वर्षा की होती।
जात-पात भूलकर सब हुए एक,
यही सच्चा सर्वधर्मसमभाव का लेख।

✨ || गुरु-राम की महिमा-काव्य समाप्त || ✨

--अतुल परब
--दिनांक-29.10.2025-बुधवार.
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