'धरती के सच्चे वंशज'-

Started by Atul Kaviraje, October 30, 2025, 10:57:46 AM

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Atul Kaviraje

National Indigenous People's Thanksgiving Day-Religious   Appreciation, Civic-

🌎 हिंदी लेख - विश्व के स्वदेशी/मूल निवासियों के प्रति आभार और सम्मान दिवस-

📜 दीर्घ हिंदी कविता - 'धरती के सच्चे वंशज'

I.
धरती जिसकी माता है, अंबर जिसका पिता,
जंगल जिसका घर है, बहती निर्मल सरिता।
वे ही सच्चे वंशज, कहलाते हैं मूल निवासी,
संस्कृति जिनकी गहरी, जीवन में शांति बसी।

II.
उनके गीतों में है, पत्तों की सरसराहट,
नृत्यों में है प्रकृति की, हर पल की आहट।
जड़ी-बूटियों का ज्ञान, उनके पास अमूल्य,
पर हमने उनको दिया, केवल इतिहास का मूल्य।

III.
उनके पूजा-पाठ में, कोई आडंबर नहीं,
वे तो पूजते हैं जीवन, कोई उनसे बड़ा नहीं।
सदियों से वे लड़ते, अपनी भूमि के लिए,
न्याय उन्हें मिले पूरा, हो यह प्रार्थना किए।

IV.
बच्चों को सिखाते वे, सम्मान करना सबका,
प्रकृति से प्रेम करना, यह नियम है पक्का।
उनके अनुभवों से सीखें, जीने की सच्ची कला,
उनका हर एक शब्द, जैसे हो कोई दुआ।

V.
उनकी कलाएँ अद्भुत, कारीगरी महान,
हर धागे, हर रंग में, भरा है गहरा ज्ञान।
भाषाएँ उनकी प्यारी, पर हो रही हैं लुप्त,
आओ बचाएँ उन्हें, बनें हम उनके मित्र।

VI.
आभार व्यक्त करें हम, उनके संघर्षों का,
जो उन्होंने सहा दर्द, उन दुःखों के क्षणों का।
उन्हें गले लगाएँ हम, सम्मान दें भरपूर,
स्वदेशी जीवन शैली, अब होनी चाहिए मशहूर।

VII.
यह धरती उनकी थी, और वे ही इसके मालिक,
हमें भी सीखना होगा, जीना बनकर धार्मिक।
उनके अधिकारों का हो, अब से पूरा सम्मान,
स्वदेशी संस्कृति की हो, विश्व भर में पहचान।

--अतुल परब
--दिनांक-29.10.2025-बुधवार.
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