🌸 हिन्दी कविता: 'राज राजेश्वर का गौरव गान' 🌸

Started by Atul Kaviraje, October 30, 2025, 11:00:36 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

⭐ श्री राज राजेश्वर सहस्त्रार्जुन जयंती: शौर्य, तप और दिव्य वरदान के प्रतीक 🔱

'पराक्रम से समाज की रक्षा और धर्म की स्थापना ही सच्चे क्षत्रिय का धर्म है।'

🌸 हिन्दी कविता: 'राज राजेश्वर का गौरव गान' 🌸

चरण

01
कार्तिक शुक्ल सप्तमी है आज, (🗓�)
गूँजे सहस्त्रार्जुन का राज। (👑)
हैहय वंश का वो थे लाल, (👶)
कृतवीर्य के जो थे सुकुमार। (🏰)

02
दत्तात्रेय के परम भक्त थे, (🔱)
तपस्या में जो सदा सक्त थे। (📿)
वरदान में पाईं सहस्र भुजाएँ, (💪)
कीर्ति फैलीं चारों दिशाएँ। (🌍)

03
नर्मदा का रोका था प्रवाह, (🌊)
रावण को दिखाया था राह। (⚔️)
दशग्रीव विजयी कहलाए, (🦁)
राज राजेश्वर सबने गाए। (🥇)

04
माहिष्मति नगरी के थे नाथ, (🏰)
सदा प्रजा के थे वो साथ। (🤝)
न्याय-धर्म का रखा ध्यान, (⚖️)
क्षत्रिय कुल का बढ़ाया मान। (🛡�)

05
सेवा, शौर्य का दिया प्रमाण, (💡)
युगों-युगों तक होता है गान। (📜)
सामाजिक उत्थान का आधार, (✨)
मिटाया हर तरह का अंधकार। (🕊�)

06
उनकी जयंती का है पर्व, (🎉)
मन में भरा है जिनका गर्व। (😌)
श्रद्धा से करते हैं सब याद, (🙏)
वीर गाथाएँ हैं आबाद। (🥁)

07
शक्ति-भक्ति का संदेश महान, (🔱)
करो अपने कर्तव्यों का ध्यान। (🎯)
उनके चरणों में कोटि प्रणाम, (💖)
जपे हर कोई सहस्त्रार्जुन नाम। (📿)

--अतुल परब
--दिनांक-29.10.2025-बुधवार.
===========================================