"सुप्रभात, शुभ गुरुवार मुबारक हो"-खिड़की की चौखट पर एक साथी ☕️🖼️

Started by Atul Kaviraje, October 30, 2025, 11:31:15 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

"सुप्रभात, शुभ गुरुवार मुबारक हो"

खिड़की की चौखट पर भाप से भरा मग

खिड़की का दृश्य साथी ☕️🖼�

शीर्षक: खिड़की की चौखट पर एक साथी ☕️🖼�

खिड़की की दहलीज़ पर रखा एक भाप निकलता मग

शीर्षक: खिड़की के दृश्य का साथी ☕️🖼�

चरण १
सुबह की ठंड खिड़की के शीशे पर है,
बाहर, दुनिया बारिश में जाग रही है। 🌧�
पर देहलीज़ पर, एक साधारण दोस्त,
एक भाप निकलता मग, सुबह के अंत तक। ☕

चरण २
गहरे तरल से, एक बादल ऊपर उठता है,
एक नरम ग्रे पर्दा जो फैलता है। 💨
यह कोमल सुन्दरता से घूमता और मुड़ता है,
इस जगह पर एक धुंधली चादर रखता है। ✨

चरण ३
इसमें समाई गर्मी, एक आरामदायक पुकार,
आपके और मेरे लिए एक शांत गुहार। 🤗
दौड़ को रोको, मन को शांत करो,
और भागती दुनिया को पीछे छोड़ दो। 🧘�♀️

चरण ४
चीनी मिट्टी का किनारा चिकना और चमकदार,
सुबह के प्रकाश को वापस करता है। ☀️
इसमें भुने हुए दानों की खुशबू है,
एक परिपूर्ण, छोटा, घरेलू दृश्य है। 🏡

चरण ५
हम सड़क पर बारिश देखते हैं,
और उसकी लयबद्ध ताल सुनते हैं। 💧
यहाँ सुरक्षित, बहुत शांत और गहरा,
जबकि व्यस्त शहर सोया हुआ है, अब भी ठहरा। 🏙�

चरण ६
एक गहरा आराम, एक साधारण कला,
हाथों को गर्म और दिल को खुश करने वाला चला। 💖
तरल धीरे-धीरे ठंडा होने लगता है,
पर आत्मा के भीतर एक चमक छोड़ जाता है। 🔥

चरण ७
आखिरी गर्म घूंट सुरक्षित रूप से खत्म हुआ,
दैनिक सफ़र शुरू हो चुका है। 🚶
पर देहलीज़ पर, मग वही रहता है,
एक याद जो अब भी सहारा देती है। 🙏

--अतुल परब
--दिनांक-30.10.2025-गुरुवार.
===========================================