"शुभ संध्या, शुभ गुरुवार मुबारक हो"-नदी के शाम के गहने 🌊✨ 🏞️🔥💡〰️🌟💖❤️🤫✨🌊

Started by Atul Kaviraje, October 30, 2025, 11:37:02 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ संध्या, शुभ गुरुवार मुबारक हो"

शांत नदी पर झिलमिलाती शाम की रोशनियाँ

नदी के शाम के रत्न 🌊✨

(शांत नदी पर झिलमिलाती शाम की रोशनी)

शीर्षक: नदी के शाम के गहने 🌊✨

🏞�🔥💡〰️🌟💖❤️🤫✨🌊🧘�♀️😊💡🙏

चरण १

दिन खत्म हो गया है, हवा ठंडी है,
नदी सोती है, एक गहरा कुंड। 🏞�
ऊपर की दुनिया ने अपनी आग जलाई है,
इच्छा को वापस दर्शाती हुई। 🔥

चरण २

पास के पुल और दूर के किनारे से,
दीपक अपना कोमल बहाव शुरू करते हैं। 💡
वे धारा पर फैलते हैं और नाचते हैं,
शांत चमक का एक घुमावदार रास्ता। 〰️

चरण ३

सुनहरे और चमकीले चांदी की धारियों में,
पानी शहर की रोशनी को थामता है। 🌟
हर लहर पूर्ण रूप को तोड़ती है,
एक शांत कला जो कोई तूफान नहीं रखती। 💖

चरण ४

नियॉन चिन्ह से एक ज्वलंत लाल,
एक तरल दर्पण, इतना दिव्य। ❤️
शांत पानी, काला और गहरा,
हजारों रहस्य यह रखता है। 🤫

चरण ५

सबसे कोमल लहर, एक अचानक कंपन,
हजारों तारे टूटने लगते हैं। ✨
वे झिलमिलाते हैं, गायब होते हैं, फिर लौटते हैं,
एक सबक जो केवल पानी ही सीख सकता है। 🌊

चरण ६

एक पल थमा हुआ, इतना स्पष्ट और विशाल,
हमेशा के लिए रहने के लिए बनी एक शांत स्मृति। 🧘�♀️
नदी बहती है, शहर आहें भरता है,
हमारी आँखों में परिलक्षित आशा। 😊

चरण ७

रात और गहरी छाया में उतरती है,
लेकिन प्रकाश का प्रतिबिंब नहीं डगमगाता। 💡
नदी छोटे सितारों को थामे रहती है,
सभी सांसारिक, भारी बाधाओं से परे। 🙏

--अतुल परब
--दिनांक-30.10.2025-गुरुवार.
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