कबीर दास-॥१॥ 🙏 कबीर की वाणी: सुख में स्मरण 🙏🚫💔

Started by Atul Kaviraje, October 31, 2025, 11:09:49 AM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

दुख में सुमरिन सब करे, सुख में करे न कोय ।
जो सुख में सुमरिन करे, दुख काहे को होय॥१॥

🙏 कबीर की वाणी: सुख में स्मरण 🙏

संत कबीर दास जी का दोहा - क्रमांक १ दुख में सुमरिन सब करे, सुख में करे न कोय । जो सुख में सुमरिन करे, दुख काहे को होय॥

श्लोक का संक्षिप्त अर्थ (Short Meaning in Hindi)

कबीर कहते हैं: संकट (दुःख) के समय तो ईश्वर को सभी याद करते हैं, पर सुख के समय कोई नहीं करता। यदि मनुष्य सुख के दिनों में भी भगवान को न भूले और उन्हें याद करता रहे, तो उसे दुःख कभी नहीं होगा।

दीर्घ हिन्दी कविता (भक्तिभावपूर्ण) - ७ पद 🌸💡

📜 🙏 कबीर का उपदेश: सुख में स्मरण 🙏

संत कबीर दास जी का दोहा - क्रमांक १

दोहा :
दुख में सुमरिन सब करे, सुख में करे न कोय ।
जो सुख में सुमरिन करे, दुख काहे को होय॥

दोहा का संक्षिप्त अर्थ (Short Meaning)
कबीर जी कहते हैं: जब मनुष्य दुःख में होता है, तो वह परमात्मा को याद करता है,
परंतु जब सुख आता है, तो वह ईश्वर को भूल जाता है।
यदि कोई व्यक्ति सुख के समय भी प्रभु का स्मरण करता रहे,
तो उसके जीवन में दुःख कभी नहीं आएगा।

🌸💡 दीर्घ हिन्दी कविता (भक्तिभावपूर्ण) - ७ कडवे
१. दुःख का आगमन

संकट का जब आँगन आता है,
आँखों में तब अश्रु भर जाता है।
दुख में सुमरिन सब करे, यही स्वभाव,
दौड़कर आता मुख पर प्रभु का भाव ।।
(आँगन: परिसर. अश्रु: आँसू. दुख में सुमरिन सब करे: दुःख में सब भगवान को याद करते हैं)

२. सुख की विस्मृति

वैभव का जब सिंहासन मिलता है,
मन के पंख हवा में उड़ते हैं।
सुख में करे न कोय, यही सच्चा खेद,
भक्ति का मार्ग होता तब भेद ।।
(सिंहासन: आसन. उड़ते हैं: बेपरवाह होते हैं. सुख में करे न कोय: सुख में कोई भगवान को याद नहीं करता)

३. सुख में अहंकार

यहीं पर होती है मानव से भूल,
नहीं भाता तब प्रभु का प्रतिरूप।
'मैं ही हूँ कर्ता' गर्व से भर जाए देह,
प्रभु की कृपा की न हो कोई याद ।।
(भूल: गलती. प्रतिरूप: चेहरा/स्वरूप. देह: शरीर)

४. कबीर का उपदेश

कहते कबीर, सुन रे इंसान,
सुख-दुःख का न कर तू गुमान।
जो सुख में सुमरिन करे, वही सच्चा ज्ञानी,
बुद्धि उसकी रहे शांत और पानी ।।
(इंसान: मनुष्य. गुमान: अहंकार)

५. निरंतर भक्ति का फल

सुख में भी जो विनम्रता रखता है,
प्रभु का स्मरण निरंतर करता है।
अहंकार का उसको न हो बंधन,
क्योंकि उसका प्रभु पर हो अटूट विश्वास ।।
(विनम्रता: लीनता. निरंतर: लगातार)

६. दुःख का निवारण

दुःख का बीज फिर कैसे उगेगा,
बुरे कर्म का फल कैसे मिलेगा?
दुख काहे को होय, यही है नियम,
भक्ति से जीत लिया जीवन का मर्म ।।
(उगेगा: जमेगा. मर्म: रहस्य)

७. निष्कर्ष और समर्पण

भक्ति हो जाए नित्य की आदत,
केवल ज़रूरत नहीं, यही है सच्चाई।
सुख में भी रखो प्रभु का हाथ,
तभी होगी जीवन नैया पार ।।
(आदत: सवय. हाथ: सहारा)

🖼� इमोजी सारांश (Emoji Saaransh): सच्ची भक्ति का नियम 🔑
दोहे का भाग   भावार्थ   इमोजी
दुख में सुमरिन सब करे   संकट में सब भगवान को याद करते हैं   😥 दुःख, 🛐 प्रार्थना
सुख में करे न कोय   पर सुख में कोई स्मरण नहीं करता   🥳 अहंकार, 😴 विस्मृति
जो सुख में सुमरिन करे   जो सुख में भी भगवान को स्मरे   😇 कृतज्ञता, 🧘�♀️ शांतता
दुख काहे को होय॥   उसे दुःख क्यों होगा?   🚫💔 दुःख नहीं, ✨ सुरक्षित

✨ समाप्त – "सुख में भी प्रभु का स्मरण ही सच्चे आनंद का आधार है।" 🌼

--अतुल परब
--दिनांक-30.10.2025-गुरुवार.
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