श्री सद्गुरु शंकर महाराज प्रकट दिन (पुणे)- हिंदी कविता: 'पुणे का अवधूत'-

Started by Atul Kaviraje, October 31, 2025, 11:32:14 AM

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Atul Kaviraje

श्री सद्गुरु शंकर महाराज प्रकट दिन (पुणे)-

हिंदी कविता: 'पुणे का अवधूत'-

१. प्रथम चरण 🚩

लेखन:
कार्तिक शुक्ल अष्टमी आई, महाराज का प्रकट दिन।
पुणे की पावन भूमि पर, भक्ति का पावन क्षण।
शंकर नाम, शिव का अवतार, दत्त गुरु का आशीर्वाद।
धनकवडी में समाधि ली, करते हैं सब जय-नाद।

हिंदी अर्थ:
कार्तिक शुक्ल अष्टमी का दिन आया है, जो महाराज का प्रकट दिन है।
पुणे की पवित्र धरती पर यह भक्ति का पावन पल है।
उनका नाम शंकर है, वे शिव के अवतार हैं, जिन पर दत्त गुरु (स्वामी समर्थ) का आशीर्वाद है।
उन्होंने धनकवडी में समाधि ली, और सभी उनकी जय-जयकार करते हैं।

२. द्वितीय चरण 🔱

लेखन:
अष्टावक्र देह था उनका, अद्भुत था वो तेज।
योगीराज की लीला निराली, मिटाते हर क्लेश।
गुरु स्वामी समर्थ थे उनके, जिनको कहते 'आई'।
उन्हीं की कृपा से जग में, भक्ति की ज्योत जलाई।

हिंदी अर्थ:
उनका शरीर आठ जगह से मुड़ा हुआ था, पर उनका तेज अद्भुत था।
योगीराज की लीलाएँ अनोखी थीं, वे हर दुःख को दूर करते थे।
स्वामी समर्थ उनके गुरु थे, जिन्हें वे 'माँ' कहकर बुलाते थे।
उन्हीं की कृपा से उन्होंने संसार में भक्ति की ज्योति जलाई।

३. तृतीय चरण 💫

लेखन:
कहते थे वो 'तेरा' अंक प्रिय, ज्ञान का था आधार।
'सब कुछ तेरा, कुछ नाही मेरा', यही था उनका सार।
वैराग्य का पाठ पढ़ाया, जीवन किया उदार।
माया-मोह से मुक्ति दी, दिखाया मोक्ष का द्वार।

हिंदी अर्थ:
वे १३ अंक को प्रिय मानते थे, जो उनके ज्ञान का आधार था।
'सब कुछ ईश्वर का है, मेरा कुछ नहीं'—यही उनके उपदेश का मूल था।
उन्होंने वैराग्य का पाठ पढ़ाया और जीवन को महान बनाया।
उन्होंने हमें सांसारिक मोह से मुक्ति दी और मोक्ष का रास्ता दिखाया।

४. चतुर्थ चरण 🌳

लेखन:
रुद्राभिषेक महापूजा हो, समाधि पर फूल चढ़ाओ।
बावन्नी स्तोत्र का पाठ करके, संकट सारे मिटाओ।
अन्न दान का बड़ा महत्व, भक्ति का दीपक जलाओ।
महाराज की कृपा पाने को, निस्वार्थ सेवा अपनाओ।

हिंदी अर्थ:
समाधि पर रुद्राभिषेक और महापूजा करो और फूल चढ़ाओ।
बावन्नी स्तोत्र का पाठ करके सारे संकट दूर करो।
अन्न दान का बहुत महत्व है, भक्ति का दीया जलाओ।
महाराज की कृपा प्राप्त करने के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा करो।

५. पंचम चरण 💖

लेखन:
कोई देखे उनको कृष्ण रूप, कोई शिव-शंभु का रूप।
भक्तों को वे दर्शन देते, हर लेते मन का कूप।
काशी और पंढरपुर भी, एक साथ दिखलाया।
योग सामर्थ्य से भक्तों को, अद्भुत ज्ञान पाया।

हिंदी अर्थ:
कोई भक्त उन्हें कृष्ण के रूप में देखता है, तो कोई शिव-शंभु के रूप में।
वे भक्तों को दर्शन देते हैं और उनके मन के अंधकार को दूर करते हैं।
उन्होंने अपनी योग शक्ति से काशी और पंढरपुर को एक ही समय में दिखाया।
भक्तों को अपनी योग शक्ति से अद्भुत ज्ञान प्राप्त कराया।

६. षष्ठम चरण 📜

लेखन:
अंतपुर गाँव में प्रकट हुए, जग ने माना अवतार।
कठिन काल में नाम उनका, करता है बेड़ा पार।
पुण्य भूमि पुणे बन गई, उनकी अमर पहचान।
महाराज की महिमा गाओ, करो उनका गुणगान।

हिंदी अर्थ:
अंतपुर गाँव में वे प्रकट हुए और संसार ने उन्हें अवतार माना।
कठिन समय में उनका नाम लेने से जीवन की नैया पार हो जाती है।
पुणे की धरती उनकी अमर पहचान बन गई है।
महाराज की महिमा का गुणगान करो, उनकी स्तुति करो।

७. सप्तम चरण 🙏

लेखन:
गुरु-भक्ति का सार सिखाया, हर प्राणी में राम को देखो।
नित्य नामस्मरण करते रहो, मन को शुद्ध रखो।
प्रकट दिन पर संकल्प लो, सेवा-धर्म निभाओ।
जय शंकर शुभंकरा बोलो, जीवन को सफल बनाओ।

हिंदी अर्थ:
उन्होंने गुरु-भक्ति का सार सिखाया, और कहा कि हर प्राणी में ईश्वर को देखो।
हमेशा नामस्मरण करते रहो और मन को पवित्र रखो।
प्रकट दिन पर संकल्प लो कि सेवा-धर्म का पालन करोगे।
जय शंकर शुभंकरा बोलो और अपने जीवन को सफल बनाओ।

--अतुल परब
--दिनांक-30.10.2025-गुरुवार.
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