विठ्ठल नवरोत्रारंभ (पंढरपुर) - भक्तवत्सल विट्ठल का उत्सव-'पंढरीचा विठ्ठल'-

Started by Atul Kaviraje, November 01, 2025, 11:39:21 AM

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Atul Kaviraje

श्री विठ्ठल नवरोत्रारंभ (पंढरपुर) - भक्तवत्सल विट्ठल का उत्सव-

हिंदी कविता: 'पंढरीचा विठ्ठल'-

१. प्रथम चरण 🧑�🤝�🧑

लेखन:
कार्तिक शुक्ल नवमी आई, भक्ति का देखो यह आरंभ।
पंढरपुर में आज सजे हैं, विठ्ठल-रुक्मिणी परम शुभ।
नवरोत्रारंभ का उत्सव प्यारा, दर्शन को दौड़े सब भक्त।
पांडुरंग की कृपा से, हर जन हुआ है आज मुक्त।

हिंदी अर्थ:
कार्तिक शुक्ल नवमी आई है, देखो यह भक्ति का आरंभ।
आज पंढरपुर में विठ्ठल और रुक्मिणी अत्यंत शुभ रूप से सजे हैं।
नवरोत्रारंभ का यह प्यारा उत्सव है, जिसके दर्शन के लिए सभी भक्त दौड़ रहे हैं।
भगवान पांडुरंग की कृपा से आज हर व्यक्ति मुक्त हुआ है।

२. द्वितीय चरण 🧱

लेखन:
पुंडलिक की भक्ति के कारण, ईंट पर खड़े हैं भगवान।
चरण स्पर्श का सुख देते, भक्तों का करते कल्याण।
आषाढ़ी और कार्तिकी वारी, वारी का अनुपम यह रूप।
विठ्ठल नाम की धुन में खोकर, मिटाते मन का हर कूप।

हिंदी अर्थ:
भक्त पुंडलिक की भक्ति के कारण भगवान ईंट पर खड़े हैं।
वे भक्तों को चरण स्पर्श का सुख देते हैं और उनका कल्याण करते हैं।
आषाढ़ी और कार्तिकी वारी (यात्रा) की तरह, यह वारी का अनुपम रूप है।
विठ्ठल नाम की धुन में खोकर, मन के सारे अंधकार को मिटाते हैं।

३. तृतीय चरण 👑

लेखन:
रुक्मिणी को पहनाए हैं, आज पुरातन सुंदर हार।
सोने के मुकुट, मोतियों की माला, अद्भुत है यह शृंगार।
लक्ष्मी का स्वरूप हैं माता, देती हैं सबको सौभाग्य।
विठ्ठल नाम जपकर, हर लो सबका दुर्भाग्य।

हिंदी अर्थ:
आज रुक्मिणी माता को प्राचीन और सुंदर हार पहनाए गए हैं।
सोने के मुकुट और मोतियों की माला है, यह शृंगार अद्भुत है।
माता रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप हैं, वे सबको सौभाग्य देती हैं।
विठ्ठल का नाम जपकर, सबका दुर्भाग्य दूर करो।

४. चतुर्थ चरण 📿

लेखन:
भजन कीर्तन अभंग की वर्षा, संत वाणी का हो रहा गान।
ज्ञानोबा तुकाराम की गाथा, देती है जीवन को नया ज्ञान।
प्रेम और समता का संदेश, वारी से हर जन सीखे।
विठ्ठल के चरणों में झुककर, भवसागर को सब जीते।

हिंदी अर्थ:
भजन, कीर्तन और अभंगों की वर्षा हो रही है, संत वाणी का गायन हो रहा है।
संत ज्ञानेश्वर और तुकाराम की कथाएं जीवन को नया ज्ञान देती हैं।
प्रेम और समानता का संदेश हर कोई वारी से सीखता है।
विठ्ठल के चरणों में झुककर सभी संसार रूपी सागर को जीत लेते हैं।

५. पंचम चरण 🌟

लेखन:
अक्षय नवमी का शुभ संयोग, देता है अक्षय पुण्य का फल।
दान पुण्य इस दिन जो करते, उनका होता है मंगल।
वृंदावन की लीला भी आज, विठ्ठल से जुड़ी है ख़ास।
भक्ति में लीन हो जाओ, रखो प्रभु पर अटूट विश्वास।

हिंदी अर्थ:
अक्षय नवमी का शुभ संयोग है, यह कभी न खत्म होने वाला पुण्य फल देता है।
इस दिन जो दान पुण्य करते हैं, उनका कल्याण होता है।
वृंदावन की लीला भी आज विठ्ठल से विशेष रूप से जुड़ी है।
भक्ति में लीन हो जाओ, और प्रभु पर अटूट विश्वास रखो।

६. षष्ठम चरण 🏛�

लेखन:
फूलों की अद्भुत सजावट, मंदिर हुआ है स्वर्ग समान।
हर कोने में गूँज रहा है, विठ्ठल नाम का मधुर गान।
महाराष्ट्र की आत्मा है विठ्ठल, हर वारकरी का है आधार।
पांडुरंग के बिना सुना है, इस दुनिया का सारा सार।

हिंदी अर्थ:
फूलों की अद्भुत सजावट की गई है, मंदिर स्वर्ग जैसा लग रहा है।
हर कोने में विठ्ठल नाम का मधुर गायन गूँज रहा है।
विठ्ठल महाराष्ट्र की आत्मा हैं, और हर वारकरी का आधार हैं।
पांडुरंग के बिना इस दुनिया का सारा सार अधूरा है।

७. सप्तम चरण 🙏

लेखन:
विनती है मेरी पांडुरंग से, सदा रखना अपनी कृपा।
नाम जपे हर श्वास हमारा, मिटे हर मन की तृष्णा।
जय जय राम कृष्ण हरि बोलो, वारी का भाव मन में लाओ।
विठ्ठल नवरोत्रारंभ पर्व, जीवन सफल तुम बनाओ।

हिंदी अर्थ:
हे पांडुरंग, मेरी आपसे विनती है कि अपनी कृपा हमेशा बनाए रखना।
हमारी हर साँस में आपका नाम हो, और मन की हर इच्छा मिट जाए।
जय जय राम कृष्ण हरि बोलो, वारी (भक्ति यात्रा) का भाव मन में लाओ।
विठ्ठल नवरोत्रारंभ पर्व से तुम अपना जीवन सफल बनाओ।

--अतुल परब
--दिनांक-31.10.2025-शुक्रवार.
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