"शुभ संध्या,शनिवार मुबारक हो"-चमकता हुआ बगीचे का रास्ता 💡🌿 🤫〰️💡🧡👣🌺✨💖🧚⏳

Started by Atul Kaviraje, November 01, 2025, 11:39:06 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ संध्या,शनिवार मुबारक हो"

हल्की रोशनी से जगमगाता एक बगीचे का रास्ता

चमकता हुआ बगीचे का रास्ता 💡🌿

(बगीचे की हल्की रोशनी से प्रकाशित एक बगीचे का मार्ग)

शीर्षक: चमकता हुआ बगीचे का रास्ता 💡🌿

🤫〰️💡🧡👣🌺✨💖🧚⏳⛲️😊🙏🕊�

चरण १

शाम की हवा स्थिर और ठंडी है,
बगीचा सोता है, एक शांत कुंड। 🤫
लेकिन जहाँ घुमावदार रास्ते मुड़ते हैं,
एक कोमल प्रकाश भेजना शुरू होता है। 〰️

चरण २

दोनों तरफ कम ऊँचाई के दीपक रखे हैं,
जहाँ रात की परछाइयों को छिपना चाहिए। 💡
वे एक मधुर, एम्बर (पीला-नारंगी) रंग डालते हैं,
उस घास पर जो अभी भी सुबह की ओस से गीली है। 🧡

चरण ३

रास्ता खुद, एक मखमली पट्टी,
होठों पर एक मीठी यात्रा। 👣
यह आत्माओं को धीरे चलने के लिए बुलाता है,
और शांत फूलों को बढ़ते हुए देखने के लिए। 🌺

चरण ४

प्रत्येक कली और पत्ती सोने से घिरी है,
अब देखने के लिए एक कीमती नज़ारा। ✨
इस शांत और सुकून भरी जगह में,
अंधेरा सुन्दरता के साथ प्रकाश से मिलता है। 💖

चरण ५

सबसे कोमल किरण, एक मार्गदर्शक हाथ,
इस छोटी, जादुई भूमि के पार। 🧚
यह रास्ता दिखाता है, लेकिन कोई जल्दबाजी नहीं,
एक उत्तम क्षण, जिसे धीरे से चखना है। ⏳

चरण ६

फव्वारे का छींटा, एक चांदी की ध्वनि,
जैसे शांत खुशी अब मुक्त होती है। ⛲️
रोशनी नीचे की शांति की रक्षा करती है,
जहाँ शांत, सुखद यादें बढ़ती हैं। 😊

चरण ७

चमकता रास्ता, एक अंतिम संकेत,
कि यह सारी शांत शांति आपकी है। 🙏
हम प्रकाश के आलिंगन का अनुसरण करते हैं,
और इस शांत जगह में अपना आराम पाते हैं। 🕊�

--अतुल परब
--दिनांक-01.11.2025-शनिवार.
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