कबीर दास जी के दोहे-॥३॥ 🙏 कविता-

Started by Atul Kaviraje, November 02, 2025, 11:02:54 AM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मन का डार दें, मन का मनका फेर॥३॥

🙏 कविता - संत कबीरदासजी का दोहा 🙏

मूल दोहा: माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका दार दीन, मन का मनका फेर॥

🕊� संक्षिप्त अर्थ:
संत कबीरदास कहते हैं: माला फेरते-फेरते वर्षों बीत गए, लेकिन मन की कुवृत्ति (बुरे विचार) नहीं बदली। इसलिए, हाथ में माला फेरना बंद करो और मन के विचारों (मनकों) को शुद्ध करने का प्रयास करो। सच्ची भक्ति आत्म-शुद्धि में निहित है।

भक्तिपूर्ण लंबी कविता (7 मधुर-कटु)

1. युगे सरली माल फिरावता ⏳📿

माला फेरते-फेरते, जुगे-जुग जले,
कई जन्म बीत गए, मानो पथ पर चलते हुए;
जप करते-करते हाथ थक गए,
लेकिन मन के विकार वैसे ही रहे।

सामग्री:
जुगे जुग जले: बहुत लंबा समय, वर्ष बीत गए।
मन के विकार: मन में बुरे विचार (क्रोध, लोभ, मोह)।

2. मन का न फिरना 😔💔

जप तो था, केवल तन,
मन भटक गया, दूर, अति धैर्यवान;
लोभ, मोह, माया का, फंदा छूटा नहीं,
वह मनका नहीं फिरा, यही तो विशाल आकाश है।

उपादान:
मन का न फिरना: मन की वृत्ति में ज़रा भी परिवर्तन नहीं हुआ।
पाश: बंधन।

3. बाह्य भक्ति का वह दिखावा 🎭🚫

हाथ में माला, दिखावा,
ईश्वर के लिए नहीं, संसार को धोखा देना;
जहाँ प्रेम नहीं, सद्भाव नहीं,
वहाँ माला जपना, व्यर्थ है।

उपादान:
दिखावा: लोगों को दिखावा करना।
व्यर्थ: वह जप निरर्थक हो जाता है।

4. अपने हाथ की माला फेंक दो ✨✋

अब इस हाथ की माला छोड़ दो,
क्या तुम्हें वह मनका चाहिए, फेंक दो;
ईश्वर को बाहरी साधनों से नहीं,
बल्कि अपने भीतर ही पाना चाहिए।

सामग्री:
कर का मनका दार दीन: हाथ की माला के मनकों को फेंक दो (बाह्य कर्मकांडों को त्याग दो)।
अंदर पाया: मन में, आत्मा में पाया।

5. मन की माला जपना 💖🔄

मन तुम्हारा है, सच्ची जप माला,
उसमें विचार, मनका मधुरता से फेरो;
सद्गुणों को धारण करो, दुर्गुणों से बचो,
यही सच्चा जप है, जो कल्याण करता है।

सामग्री:
मन का मनका फेर: मन के विचारों को बदलो (शुद्ध करो)।
कल्याण ताल: जीवन में कल्याण लाता है।

6. शुद्धि का महत्व 🧼🤍

जब मन शुद्ध, शांत और निर्मल हो,
तो ईश्वर से मिलन निश्चित है;
सत्य, प्रेम, क्षमा, ये सरल मनके,
इन विचारों में मन लीन हो जाता है।

सामग्री:
मन शुद्ध, शांत और निर्मल हो जाता है: मन अपराध-मुक्त हो जाता है।
निश्चित: निश्चित।

7. कबीर का अंतिम उपदेश 🗣�👑

कबीरदास कहते हैं, साधक, तुम्हें यह जानना चाहिए,
कि आत्म-ज्ञान पाखंड से नहीं मिलता;
यदि मन बदल जाए, तो सब कुछ प्राप्त हो जाता है,
यही भक्ति का मार्ग है, विट्ठलसी प्राप्त होते हैं।

सामग्री:
पाखंड: दिखावे, पाखंड से।
विट्ठलसी प्राप्त होते हैं: ईश्वर (विट्ठल) प्राप्त होते हैं।
इमोजी सारांश (इमोजी सारांश)
प्रयास किया: माला घुमाई 📿🔄 (काफी देर तक ⏳)

असफल परिणाम: मन नहीं बदला 😠😡 (मन क्यों बदला 💔)

कबीर का आदेश: माला हाथ में ही रहने दो ✋❌

असली उपाय: मन को शुद्ध करो (अपने विचार बदलो) 🧠✨

अंतिम संदेश: आंतरिक शुद्धता ही सच्चा मार्ग है! 💖🧘

--अतुल परब
--दिनांक-01.11.2025-शनिवार.
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