🪷 प्रबोधिनी एकादशी 🪷 🌺 🌺

Started by Atul Kaviraje, November 02, 2025, 11:36:57 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

🪷 प्रबोधिनी एकादशी 🪷

🌺 पद १ 🌺
उठो उठो हे श्रीहरि, जागो अब इस सृष्टि को,
चार मास निद्रा हुई, अब दो सही दृष्टि को।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष, एकादशी ये पावन,
प्रबोधिनी नाम इसका, जाग उठे ये जीवन।

अर्थ:
हे श्रीहरि, जागकर सृष्टि को जगाओ।
चार महीने की नींद पूरी हुई, अब जीवन को सही दिशा दो।
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की यह एकादशी पवित्र है।
प्रबोधिनी इसका नाम है, जिससे जीवन जागृत होता है।

🌟 पद २ 🌟
देवशयनी से शुरू, था चतुर्मास का पथ,
शुभ कार्यों पर लग गई, उस दिन से ही हद।
आज टूटा वह बंधन, खुले सारे ही द्वार,
विष्णु जगे योगनिद्रा से, हुआ जय-जयकार।

अर्थ:
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हुआ था, तब से ही शुभ कार्य रुक गए थे।
आज वह बंधन टूट गया है, सारे मार्ग खुल गए हैं।
भगवान विष्णु योगनिद्रा से जाग गए हैं।
सब जगह जय-जयकार हो रहा है।

🌿 पद ३ 🌿
तुलसी-शालिग्राम का, मंडप में सोहला सजा,
विष्णु का तुलसी से ब्याह, मन में आनंद उपजा।
शादी की यह आहट, मंगलाष्टक की ध्वनि,
संसार के कामों को, अब मिलेगी गुरु-जननी।

अर्थ:
तुलसी और शालिग्राम का विवाह मंडप में सज गया है।
विष्णु का तुलसी से विवाह होने से मन में खुशी उत्पन्न हुई है।
यह विवाह की शुरुआत है, शुभ गीत शुरू हो गए हैं।
अब सांसारिक कार्यों को एक नई दिशा मिलेगी।

🔔 पद ४ 🔔
खड़े संत हैं गाते, ताल मृदंग की गूँज,
विठुराया के दर्शन, संवाद ना अब चूकूँ।
पंढरी की वारी का, लाभ आज हम लें,
हरि के नाम में सब दुःख, भूलकर हम रहें।

अर्थ:
संतजन खड़े होकर गा रहे हैं, ताल और मृदंग की ध्वनि गूंज रही है।
विठ्ठल के दर्शन और उनके साथ संवाद करने का अवसर न छोड़ें।
आज पंढरपुर यात्रा का लाभ लें।
हरि के नाम-जप में सब दुखों को भूल जाएं।

💰 पद ५ 💰
घर-घर में दीप जले, तेज की वो माला,
लक्ष्मी-नारायण की पूजा, दूर होवे विपदा।
सत्य, शांति, धर्म, नीति, फिर से स्थापित हों,
अज्ञान के अंधकार को, ज्ञान की ज्योति दें।

अर्थ:
घर-घर में दीपक जल रहे हैं, यह तेज की सुंदर माला है।
लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से बुरा समय दूर होगा।
सत्य, शांति, धर्म और नैतिकता फिर से स्थापित हों।
अज्ञान के अंधेरे को ज्ञान की ज्योति दें।

🙏 पद ६ 🙏
मांगलिक कार्यों का, आज से ही है आरंभ,
खुश हैं सारे लोग, सोहला यह अनुपम।
नए कार्य की शुरुआत, उत्साह की लहर,
देवों की कृपा से होगी, सफलता की डगर।

अर्थ:
शुभ कार्यों की शुरुआत आज से ही हो रही है।
सभी लोग खुश हैं, यह उत्सव बहुत खास है।
नए कार्यों का प्रारंभ हुआ है, उत्साह की लहर आई है।
देवताओं की कृपा से सफलता का मार्ग निश्चित होगा।

😇 पद ७ 😇
जागो हे मानव, आत्मा के प्रकाश में,
भक्तिभाव मन में धरो, मत रहो भ्रम जाल में।
प्रबोधिनी पर्व यह, देता है नया संदेश,
सद्गुणों को सँभालो, त्यागो सारे क्लेश।

अर्थ:
हे मनुष्य, आत्मा के प्रकाश में जागृत हो जाओ।
मन में भक्तिभाव रखो, भ्रमजाल में न रहो।
यह प्रबोधिनी पर्व एक नया संदेश देता है कि
सद्गुणों को संभालो और सभी दुखों को त्याग दो।

--अतुल परब
--दिनांक-01.11.2025-शनिवार.
===========================================