🔱 श्री सप्तकोटेश्वर वर्धापन दिवस शोभायात्रा 🔱 🕉️ 🕉️

Started by Atul Kaviraje, November 02, 2025, 11:38:08 AM

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Atul Kaviraje

🔱 श्री सप्तकोटेश्वर वर्धापन दिवस शोभायात्रा 🔱

🕉� पद १ 🕉�
नार्वे गोवा की भूमि, आज हुई है पावन,
श्री सप्तकोटेश्वर का, है यह वर्धापन दिन।
नए वैभव में खड़ा, शिवशंकर का धाम,
जयकारों की गूँज में, गूँजा यह नाम।

अर्थ:
गोवा की नार्वे की धरती आज पवित्र हो गई है, क्योंकि श्री सप्तकोटेश्वर का वर्धापन दिवस है।
नए तेज में खड़ा यह शिवशंकर का निवास है।
जय-जयकार के शोर में यह नाम सब जगह गूँज उठा है।

🎉 पद २ 🎉
सजी शोभायात्रा भव्य, निकला यह उत्सव,
पताकाओं की गड़गड़ाहट और, भक्ति का जमाव।
मंदिर के कलश पर, सूर्य किरणें चमकती,
शिवभक्तों के मुख पर, आनंद की मूरत दिखती।

अर्थ:
भव्य शोभायात्रा सजी है, यह उत्सव शुरू हो गया है।
झंडों का शोर हो रहा है और भक्तों का समूह इकट्ठा है।
मंदिर के शिखर पर सूर्य की किरणें चमक रही हैं।
शिवभक्तों के चेहरे पर आनंद की भावना दिखाई दे रही है।

👑 पद ३ 👑
छत्रपति शिवाजी राजा, याद उनकी आती,
पुर्तगालियों को हराकर, मूर्ति फिर स्थापित की।
जीर्णोद्धार का पुण्य, जोड़ा मराठा वीर ने,
इस धरती पर हुआ, धर्म का यह सुधार।

अर्थ:
छत्रपति शिवाजी महाराज की याद आती है।
उन्होंने पुर्तगालियों को हराकर फिर से मूर्ति की स्थापना की।
इस जीर्णोद्धार का पुण्य मराठा वीरों ने जोड़ा।
इस भूमि पर धर्म का पुनरुद्धार हुआ।

🔔 पद ४ 🔔
ढोल-ताशों का शोर, भक्तों के मुख में स्तोत्र,
महादेव का दर्शन, आज हुआ पवित्र।
सप्तकोटि का तेज, इस लिंग में समाया,
दुःख का अंधकार हटे, ज्ञान का प्रकाश छाया।

अर्थ:
ढोल-ताशों की आवाज़ गूंज रही है, भक्तों के मुंह से प्रार्थनाएं निकल रही हैं।
आज महादेव का पवित्र दर्शन प्राप्त हो रहा है।
सात करोड़ देवताओं का तेज इस शिवलिंग में समाया है।
जिससे दुःख का अंधेरा दूर होता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

🎶 पद ५ 🎶
कोंकण भूमि का यह मान, संस्कृति का प्रतीक,
धर्म-रक्षा का दायित्व, शिवराय ने साधा ठीक।
हर हर महादेव गरजे, नार्वे की सड़कों पर,
शंभू की कृपा से, जीवन खिला और सुंदर।

अर्थ:
यह कोंकण की भूमि का सम्मान है, अपनी संस्कृति का प्रतीक है।
धर्म-रक्षा की जिम्मेदारी शिवाजी महाराज ने ठीक से निभाई।
'हर हर महादेव' का जयघोष नार्वे की सड़कों पर गूंज रहा है।
शंकर की कृपा से जीवन और भी खिल उठा है।

🙏 पद ६ 🙏
ध्वस्त हुए मंदिर को, दिया फिर से गौरव,
भक्ति के इस मार्ग पर, नहीं कोई भय अब।
एक-एक भक्त जुटा, पूजा का बड़ा आयोजन,
ईश्वरीय शक्ति का अनुभव, आज सबको हुआ दर्शन।

अर्थ:
नष्ट हुए मंदिर को फिर से भव्यता मिली।
भक्ति के इस मार्ग पर कोई डर नहीं है।
हर एक भक्त इकट्ठा हुआ है, पूजा का बड़ा उत्साह है।
आज सभी को ईश्वरीय शक्ति का अनुभव मिला।

😇 पद ७ 😇
सप्तकोटेश्वर देवा, तेरा रूप है अद्भुत,
भक्तों का संकट हरने वाला, तू ही उनका सहारा।
यह वर्धापन दिवस, लाए आनंद अपार,
संजोकर यह धरोहर, करें धर्म का विस्तार।

अर्थ:
हे सप्तकोटेश्वर देव, आपका रूप बहुत ही खास और सुंदर है।
आप ही भक्तों का संकट दूर करने वाले, उनके सहारे हो।
यह वर्धापन दिवस बहुत अधिक आनंद लाए।
इस सांस्कृतिक धरोहर को बचाकर हम धर्म का विस्तार करें।

--अतुल परब
--दिनांक-01.11.2025-शनिवार.
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