"शुभ दोपहर,रविवार मुबारक हो"-बगीचे की मेज़ का खजाना 🍉🍹🍎🥝🍋

Started by Atul Kaviraje, November 02, 2025, 11:24:50 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ दोपहर,रविवार मुबारक हो"

बगीचे की मेज़ पर ताज़ा फल और एक ताज़ा पेय

बगीचे की मेज़ का खजाना 🍉🍹

(बगीचे की मेज पर ताज़ा फल और एक स्फूर्तिदायक पेय)

शीर्षक: बगीचे की मेज के खजाने 🍉🍹

चरण १
छितरी हुई छाया में, जहाँ सूरज की किरणें पड़ती हैं,
एक छोटी सफेद मेज सबके लिए खड़ी है। 🌳
प्रकृति की देन के साथ, उज्जवल और साहसी,
एक मीठी कहानी, खुलने का इंतजार करती हुई। 📖

चरण २
फल कटे हुए हैं, एक जीवंत रंगत में,
लाल और हरे और धूप वाले पीले रंग के साथ। 🍎🥝🍋
एक परिपूर्ण नज़ारा, एक रसीली चमक,
जैसे ग्रीष्मकालीन सपने से खींचे गए हों रंग। 💖

चरण ३
खरबूजे के टुकड़े, ठंडे और कुरकुरे,
होंठों पर एक मीठा आनंद। 🍉
जामुनी जामुन गोल आकार में टिके हैं,
धरती पर सबसे अच्छे व्यंजन यहीं मिलते हैं। 🍇

चरण ४
एक गिलास साफ तरल से भरा है,
सारी गर्मी और डर को दूर करता है। 🧊
बर्फ से ढकी बाहरी सतह और पुदीने की सुगंध,
एक शुद्ध खुशी, स्वर्ग से भेजी हुई। 🍃

चरण ५
बर्फ के टुकड़े धीमी ध्वनि से टकराते हैं,
धीमे समय की एक मधुर धुन। 🎶
इस शांत जगह में कोई जल्दी नहीं है,
बस साधारण खुशी और शांत सुन्दरता। 🧘�♀️

चरण ६
धूप के नीचे रुका हुआ एक क्षण,
साधारण आनंद शुरू हो चुका है। 😊
ताज़गी का स्वाद, मीठा और गहरा,
एक प्यारा वादा जिसे हमें निभाना है। ✨

चरण ७
धरती और बारिश और सूरज की अपनी शक्ति से,
हम इस सुनहरे पल का जश्न मनाते हैं। 🙏
हम शांति से बैठते हैं, खाते हैं, पीते हैं,
और इस खुशहाल बंधन को महसूस करते हैं। 🔗

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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