"शुभ संध्या,रविवार मुबारक हो"-शाम की सैर का सुकून 🌳🚶‍♀️ 🌅⏳🏡🚶🗣️🤫🤝🧘‍♂️💡

Started by Atul Kaviraje, November 02, 2025, 11:27:55 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ संध्या,रविवार मुबारक हो"

पार्क में लोगों की चहलकदमी के बीच एक शांत शाम

शाम की सैर, शांति 🌳🚶�♀️

(टहलते हुए लोगों के साथ पार्क में एक शांत शाम)

शीर्षक: शाम की सैर का सुकून 🌳🚶�♀️

🌅⏳🏡🚶🗣�🤫🤝🧘�♂️💡🎶💙💖🌙🙏

संध्याकाळ की सैर – शांत पल 🌳🚶�♀️

चरण १

सूरज नीचे डूबता है, आकाश साफ़ है,
परछाइयों को हटाता है, डर को मिटाता है। 🌅
पार्क एक स्वागत योग्य आह भरता है,
जैसे सुनहरे पल धीरे-धीरे गुजरते हैं। ⏳

चरण २

रास्ते हल्के कदमों से चिह्नित हैं,
रात से पहले घर लौट रहे हैं। 🏡
कोई जल्दी नहीं, कोई उन्मादी दौड़ नहीं,
बस इस जगह में शांत हलचल। 🚶

चरण ३

हवा घास की महक से ताज़ा है,
जैसे कोमल बातचीत होती है। 🗣�
पेड़ों के बीच एक धीमी गूँज बहती है,
वह शांत शांति जो शाम जानती है। 🤫

चरण ४

एक जोड़ा एक हाथ को इतनी करीब थामे है,
हर संदेह और डर को दूर करते हुए। 🤝
एक बुजुर्ग व्यक्ति बेंच पर बैठा है,
जीवन की लंबी, स्थिर पीड़ा को शांत करते हुए। 🧘�♂️

चरण ५

हल्की स्ट्रीटलाइट्स चमकना शुरू करती हैं,
जहाँ परछाइयाँ जाती हैं उसे दर्शाती हैं। 💡
वे घूमने वालों को आगे बढ़ाती हैं,
शाम का गीत सुनने के लिए। 🎶

चरण ६

पत्तियाँ नीले रंग के सामने गहरी हैं,
एक सरल, शांत, उत्तम दृश्य। 💙
सिर पर एक शांत आशीर्वाद,
जैसे जीवन के छोटे आनंद धीरे-धीरे फैलते हैं। 💖

चरण ७

आखिरी कदम फीके पड़ जाते हैं, द्वार कसकर बंद होते हैं,
पार्क शांत रात को गले लगाता है। 🌙
शांति की एक स्मृति रखी जाती है,
उन दिलों में जिन्होंने चलते हुए आराम किया। 🙏

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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