📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-68-‘स्थितप्रज्ञाचे रहस्य’-👁️

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 10:27:42 AM

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Atul Kaviraje

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-68-

तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।68।।

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २ : सांख्य योग - श्लोक ६८

🌟 श्लोक :

तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।। ६८।।

अर्थ (Meaning):

जिस साधक ने अपनी सभी इंद्रियों को उनके विषयों के आकर्षण से पूरी तरह हटा लिया है,
उसकी बुद्धि वास्तव में स्थिर (स्थितप्रज्ञ) हो गई है।

🌺  कविता (भक्तिभावपूर्ण)

'स्थितप्रज्ञाचे रहस्य'

आरंभ 1: अर्जुन और विषय को संबोधित करते हुए

हे महाबाहुओं, इस श्लोक को सुनो,
मन विषयों के संसार में भटक रहा है।
हे धारी, ध्यान कहता है,
स्थिर बुद्धि का अभ्यास ही सत्य है।

कदवे 2: इंद्रियों की प्रवृत्ति

👁� कान, त्वचा, नेत्र, स्वाद कलिकाएँ,
सभी बड़ी तेजी से बाह्य अर्थों की ओर दौड़ते हैं।
रूप-गंध-शब्द के प्रति इनका आकर्षण,
ये चोर बुद्धि को लूटते हैं।

कदवे 3: संयम और कवच

🛡� जो साधक इन्हें पूर्णतः आवृत कर लेता है,
वह विषयों के प्रवाह द्वारा इनके अभाव को जान लेता है।
यह सभी के लिए मूल मंत्र है,
यह उन्हें कछुआ तंत्र की भाँति कवच में खींच लेता है।

कदवे 4: बुद्धि की स्थिरता

मन शांत था, बुद्धि स्थिर थी,
तब धैर्य में कोई अस्थिरता नहीं रहती।
सत्य को जानो,
फिर सहजता से ईश्वर के सिद्धांतों में आनंदित होओ।

कदवे 5: ज्ञान का प्रकाश

☀️ शाश्वत ज्ञान का प्रकाश वहाँ पड़े,
मोह-माया तब भाग जाए।
अचल, स्थिर, उसका मन शांत हो,
यही आत्मा का सच्चा जीवन है।

कदवे 6: भक्ति का आधार

यह संयम, यह वैराग्य, भक्ति का आधार है,
जीवन का भार प्रभु के चरणों में रखा जाता है।
पूर्ण संयम ही सच्ची सेवा है,
ईश्वर तुम्हें परम शांति प्रदान करें।

अध्याय 7: उपसंहार और प्रार्थना

🙏 तस्मात् साधक, इंद्रियों को वश में करो,
बुद्धि की स्थिरता आत्मा में है।
यही स्थिर के ज्ञान का रहस्य है,
ईश्वर की कृपा से तुम संतुष्ट रहो।

🌸 इमोजी सारांश
अंश शब्द अर्थ इमोजी सारांश

तस्मात् (इसलिए) तर्क शब्द पिछले खतरों से सीखना 💡
महाबाहो (अर्जुन) महाबाहु, अपनी आंतरिक शक्ति का उपयोग करो 💪
निगृहीतानि सर्वव्यापी, सभी इंद्रियों का पूर्ण संयम 🔒
इंद्रियाणि इंद्रियार्थेभ्य: इंद्रियाँ इंद्रियों के विषयों से, आँख, कान, जीभ - विषय (सुख) को छोड़कर 👁�👂👅❌
तस्य प्रज्ञा स्त्रितिया उसकी बुद्धि स्थिर हो जाती है। अंतिम परिणाम: अचल और अविचल बुद्धि 🧘�♀️⛰️

✨ अंत — "स्थिर व्यक्ति के स्थिर जीवन का रहस्य पूर्ण संयम और ईश्वर के प्रति समर्पण है।" ✨

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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