🚩 कार्तिकी पंढरपुर यात्रा 🚩

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:44:16 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: 🚩 कार्तिकी पंढरपुर यात्रा 🚩

🚩 पद १ 🚩
विट्ठल की पंढरी, आज भक्ति में नहाई,
कार्तिकी एकादशी, महापुण्य की आई।
चंद्रभागा के तट पर, वारकरी का मेला,
विठुराया से मिलने का, जुड़ा यह सोहला।

💠 अर्थ: विट्ठल की पंढरपुर नगरी आज भक्ति से सराबोर है।
महापुण्य की कार्तिकी एकादशी आज आई है।
चंद्रभागा नदी के किनारे वारकरियों का बड़ा समूह जमा हुआ है।
विठुराया से मिलने के लिए यह उत्सव जुड़ा है।

🎶 पद २ 🎶
ज्ञानोबा-तुकोबा की, पालकी का है रास्ता,
ताल, मृदंग की ध्वनि से, भरा है सारा वास्ता।
विट्ठल नाम का जयघोष, चलता है दिन-रात,
मुख में हरि, मन में भक्ति, तोड़कर सारे घात।

💠 अर्थ: संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम की पालकी का रास्ता है, टाल और मृदंग की आवाज से सारा वातावरण गूंज रहा है।
विट्ठल नाम का जयघोष दिन-रात चल रहा है।
मुख में हरि का नाम और मन में भक्ति रखकर, वारकरी सब बंधनों को तोड़कर आए हैं।

🚶�♂️ पद ३ 🚶�♂️
ध्वजा पताका लेकर, चलते हैं वारकरी,
पाँव में छाले पड़े, पर थके नहीं जरा भी।
भेदभाव को बिसराकर, एक ही उनका पंथ,
विट्ठल माऊली चरण में, रखने को आतुर माथा।

💠 अर्थ: हाथ में दिंडी की ध्वजा लेकर वारकरी चल रहे हैं।
पाँव में छाले पड़ गए हैं, फिर भी वे थके नहीं हैं।
सभी भेदभावों को भूलकर उनका एक ही मार्ग है,
वह है विट्ठल माऊली के चरणों में माथा रखने की उनकी तीव्र इच्छा।

🪷 पद ४ 🪷
आज देव का पलंग, हटाया मंदिर से,
चौबीस घंटे दर्शन, कतार लगी द्वारे से।
भक्तों से मिलने को, विठू खड़ा है ईंट पर,
प्रेम से देखता वह, आये हर एक भक्त पर।

💠 अर्थ: आज भगवान का पलंग (विश्राम का स्थान) मंदिर से बाहर निकाला गया है।
भक्तों के लिए चौबीस घंटे दर्शन शुरू हैं, इसलिए द्वार पर लंबी कतार लगी है।
भक्तों से मिलने के लिए विट्ठल मूर्ति पर खड़े हैं।
वह प्रेम से आये हुए हर एक वारकरी को देख रहे हैं।

🌿 पद ५ 🌿
तुलसी का विवाह आज, मीठा हुआ पानी,
संसार को मिला आधार, विट्ठल की कहानी।
मांगलिक कार्यों का, फिर से आरंभ होवे,
सुख-समृद्धि की आशा, हृदय में बढ़ती रहे।

💠 अर्थ: आज तुलसी का विवाह हो रहा है, इसलिए वातावरण मधुर हो गया है।
विट्ठल की कहानी संसार को आधार देती है।
शुभ कार्यों की फिर से शुरुआत हो रही है।
सुख और समृद्धि की आशा हृदय में बढ़ती रहे।

🙏 पद ६ 🙏
भीमा तट रेती में, भक्ति का यह सागर,
गाथा-भजन कीर्तन से, गूँजे यह शोर-गजर।
एक-दूजे की मदद करो, यही उनका नेम,
वारी का यह नियम, इसमें भरा है प्रेम।

💠 अर्थ: भीमा नदी के किनारे रेत में भक्ति का बड़ा सागर उमड़ पड़ा है।
संत गाथा, भजन और कीर्तन से सब जगह आवाज़ गूंज रही है।
एक-दूसरे की मदद करना, यही उनका नियम है।
वारी के इस नियम में बहुत प्रेम भरा हुआ है।

💡 पद ७ 💡
कार्तिकी एकादशी, ज्ञानदीप जलाया,
मोक्ष और मुक्ति का, मार्ग सरल बनाया।
पांडुरंग की कृपा से, जीवन हो सफल,
पंढरी की वारी फिर मिले, यही है सबसे बड़ा फल।

💠 अर्थ: कार्तिकी एकादशी के कारण ज्ञान का दीपक प्रज्वलित हुआ है।
मोक्ष और मुक्ति का मार्ग सरल हो गया है।
पांडुरंग की कृपा से जीवन सफल हो।
पंढरपुर की यात्रा फिर मिले, यही सबसे बड़ा फल है।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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