✨ श्री विष्णु प्रबोधोत्सव ✨

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:44:46 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: ✨ श्री विष्णु प्रबोधोत्सव ✨

🔆 पद १ 🔆
चार मास हुए देवा, योगनिद्रा पूरी,
शंख ने नाद किया, जगाओ प्रभु को ही।
आज प्रबोधोत्सव यह, आनंदित रविवार,
विष्णु के जागने से, हुआ जय-जयकार।

💠 अर्थ: हे देव, चार महीने हो गए, अब आपकी योगनिद्रा पूरी हो गई है।
शंख ने आवाज़ करके भगवान को जगाने का आह्वान किया है।
आज यह प्रबोधन का उत्सव है, यह रविवार खुशी लेकर आया है।
भगवान विष्णु के जागने से सब जगह जय-जयकार हो रहा है।

👑 पद २ 👑
सजे गगन में तारे, धरती पर दीप-कतार,
लक्ष्मी-नारायण की, शुरू हुई आरती अपार।
मंडप डाला आँगन में, तुलसी के पास खास,
चातुर्मास का काल बीता, मिटा वह वनवास।

💠 अर्थ: आकाश में तारे सजे हैं, धरती पर दीपों की कतार लगी है।
लक्ष्मी और नारायण की भव्य आरती शुरू हो गई है।
आंगन में, तुलसी के पास खास मंडप डाला गया है।
चातुर्मास का समय समाप्त हो गया है, और सभी बंधन दूर हो गए हैं।

🪷 पद ३ 🪷
जागें अब श्रीहरि, जग को दें ज्ञान,
सत्य और धर्म को, मिले फिर से मान।
जीवन के अज्ञान का, अंधकार मिट जाये,
भक्ति के प्रकाश में, नया मार्ग मिल पाये।

💠 अर्थ: हे श्रीहरि, आप जागें और दुनिया को ज्ञान दें।
सत्य और धर्म को फिर से सम्मान मिले।
जीवन के अज्ञान का अंधेरा दूर हो जाए।
भक्ति के प्रकाश में एक नया रास्ता मिल जाए।

🔔 पद ४ 🔔
जागते ही भगवन, शुभकार्य शुरू,
मुंडन, विवाह, गृहप्रवेश को, नहीं अब कोई गुरु।
तुलसी-शालिग्राम का, सोहला यह महान,
भक्तों के मन में आज, खुशी का है स्थान।

💠 अर्थ: भगवान के जागते ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
मुंडन, विवाह और गृहप्रवेश जैसे कार्यों पर अब कोई बंधन नहीं रहा।
तुलसी और शालिग्राम के विवाह का यह बड़ा उत्सव है।
आज भक्तों के मन में बहुत आनंद है।

💰 पद ५ 💰
वासुदेव-कृष्ण को, आज लगाओ पुकार,
पुण्य की कमाई हो, पाप का हो संहार।
विष्णु सहस्रनाम का, जाप सब करें,
हर श्वास में देवा, तेरा वास हो हरे।

💠 अर्थ: आज वासुदेव-कृष्ण (विष्णु) को पुकार लगाएं।
हमें पुण्य की प्राप्ति हो और पाप का नाश हो।
विष्णु सहस्रनाम का जाप करें।
हे देव, हमारी हर श्वास में आपका निवास हो।

🙏 पद ६ 🙏
प्रबोधिनी पर्व यह, मंगल की पहचान,
धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, मिले सभी गुण-मान।
मन शांत, चित्त प्रसन्न, तन पवित्र होवे,
हरि के नाम-जप से, आत्मा मुक्ति को पावे।

💠 अर्थ: यह प्रबोधोत्सव शुभता की निशानी है।
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों पुरुषार्थ प्राप्त हों।
मन शांत हो, चित्त प्रसन्न हो और शरीर पवित्र हो जाए।
हरि के नाम-जप से आत्मा को मुक्ति मिलती है।

😇 पद ७ 😇
सब संतों की वारी, पंढरपुर चली,
विट्ठल से भेंट होकर, भक्ति रंग में रली।
विष्णु प्रबोधोत्सव यह, दे नया एहसास,
जीने का सूत्र मिले, मन को मिले खास।

💠 अर्थ: सभी संतों की यात्रा पंढरपुर गई है।
विट्ठल से मिलकर भक्ति और भी गहरी हो गई है।
यह विष्णु प्रबोधोत्सव जीवन को एक नया लक्ष्य देता है।
जीने का सही अर्थ समझ आता है और मन को एक विशेष आनंद मिलता है।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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