🌿 तुलसी विवाह उत्सव का आरंभ 🌿

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:45:15 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: 🌿 तुलसी विवाह उत्सव का आरंभ 🌿

💍 पद १ 💍
हुआ चातुर्मास समाप्त, आज द्वादशी को,
तुलसी विवाह का, आरंभ हुआ मीठा।
मंडप सजा आँगन में, द्वार पर तोरण लगे,
शालिग्राम वर के लिए, वृंदा सजकर आईं।

💠 अर्थ: आज द्वादशी तिथि को चातुर्मास (चार महीने) का समय समाप्त हो गया है।
तुलसी विवाह का मीठा उत्सव शुरू हो गया है।
आंगन में मंडप सज गया है, दरवाजों पर तोरण लगाए गए हैं।
शालिग्राम (विष्णु) दूल्हे के लिए तुलसी (वृंदा) सज-धजकर आई है।

👑 पद २ 👑
देवों का जागरण हुआ, प्रबोधिनी के दिन,
मांगलिक कार्यों का अब, आरंभ होवे सविन।
पीले वस्त्रों में, तुलसी का यह रूप,
नारायण से जुड़ा है, उनका सुंदर स्वरूप।

💠 अर्थ: देवताओं का जागरण (जागना) एकादशी के दिन हुआ।
अब सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होने वाली है।
पीले वस्त्रों में तुलसी का यह रूप बहुत सुंदर लग रहा है।
नारायण के साथ उनका सुंदर संबंध जुड़ा है।

🪔 पद ३ 🪔
घर-घर में जले दीपक, दीपों की वह माला,
सभी भक्तों के मन में, आनंद का ताला।
हल्दी, कुमकुम, अक्षत, लेकर आईं नारियाँ,
विष्णु का आशीर्वाद, ले यह संसार।

💠 अर्थ: घर-घर में दीपक जलाए गए हैं, यह दीपों की सुंदर माला है।
सभी भक्तों के मन में आनंद की लहर है।
हल्दी, कुमकुम और अक्षत लेकर महिलाएँ आईं हैं।
इस दिन विष्णु का आशीर्वाद लेकर यह संसार सुखी होगा।

🎶 पद ४ 🎶
झाड़ू-रंगोली डाली, आँगन हुआ स्वच्छ,
तुलसी के विवाह का, उत्सव यह प्रत्यक्ष।
नववधू के रूप में, तुलसी लगे सुंदर,
नारदमुनि ने गाए, मंगलाष्टक मधुर।

💠 अर्थ: पोछा और रंगोली डाली गई है, आंगन साफ हो गया है।
तुलसी का विवाह उत्सव आज हमारी आँखों के सामने देखने को मिल रहा है।
नववधू के रूप में तुलसी बहुत सुंदर लग रही है।
नारदमुनि ने मधुर मंगलाष्टक गाए हैं।

🙏 पद ५ 🙏
शालिग्राम रूठे थे, तुलसी के क्रोध से,
चार माह की तपस्या, खत्म हुई प्रेम से।
आज से प्रेम उनका, अखंड रहेगा,
भक्तों के जीवन में, सुख-शांति देगा।

💠 अर्थ: वृंदा के श्राप के कारण शालिग्राम (विष्णु) रूठे हुए थे।
उनकी चार महीने की तपस्या आज उनके प्रेम के कारण पूरी हुई।
आज से उनका प्रेम निरंतर रहेगा।
वह भक्तों के जीवन में सुख और शांति देगा।

🌿 पद ६ 🌿
तीर्थ रूप है तुलसी, घर की वह लक्ष्मी,
उनकी कृपा से होती, दुःख-दरिद्रता में कमी।
पूजा में मान उनका, विष्णु को वह प्रिय,
मोक्ष और मुक्ति का, मार्ग दिखाती नित।

💠 अर्थ: तुलसी तीर्थ के समान पवित्र है, वह घर की लक्ष्मी मानी जाती है।
उनकी कृपा से दुःख और गरीबी कम होती है।
पूजा में उन्हें सम्मान मिलता, वह विष्णु को प्रिय हैं।
वह मोक्ष और मुक्ति का सही मार्ग दिखाती हैं।

😇 पद ७ 😇
तुलसी विवाह का यह, आरंभ हुआ मीठा,
संसार को मिला आधार, मन में खुशी समेटा।
शादी की यह आहट, बजी ज़ोरों से,
शुभ-मंगल कार्यों की, शुरुआत इसी समय से।

💠 अर्थ: तुलसी विवाह का यह उत्सव मधुर हुआ है।
संसार को आधार मिला है और मन में आनंद भर गया है।
शादी की आहट ज़ोरों से बज उठी है।
सभी शुभ कार्यों की शुरुआत इसी शुभ समय में हो गई है।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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