🚪 चातुर्मास समाप्ति उत्सव 🚪

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:46:24 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: 🚪 चातुर्मास समाप्ति उत्सव 🚪

⏳ पद १ ⏳
चार महीनों का काल, आज हुआ समाप्त,
संयम के व्रत से, मन हुआ है शांत।
कार्तिकी एकादशी, आई सोने के पाँव,
चातुर्मास की समाप्ति, सुख की यह आहट।

💠 अर्थ: संयम और नियमों का पालन करने का चार महीनों का समय आज समाप्त हो गया है, जिससे मन शांत हो गया है।
सोने के कदमों से कार्तिकी एकादशी आई है।
चातुर्मास की समाप्ति सुख और आनंद की शुरुआत है।

👑 पद २ 👑
देवों का वह शयन, आज खत्म हुआ सारा,
जागे हैं श्रीविष्णु, दूर हुआ अँधेरा।
धरती के कार्यों को, फिर मिली रफ़्तार,
शुभ-मांगलिक कार्यों का, बढ़ा यह बहार।

💠 अर्थ: देवताओं का (विष्णु का) शयन आज पूरी तरह से समाप्त हो गया है।
श्रीविष्णु जाग गए हैं और सारा अंधकार दूर हो गया है।
पृथ्वी पर सभी कार्यों को फिर से गति मिली है।
शुभ और मांगलिक कार्यों का प्रवाह अब बढ़ गया है।

🙏 पद ३ 🙏
एक समय का भोजन, जाप और वह ध्यान,
किए जो नियम, उसका मिला सम्मान।
पत्तेदार सब्जी, बैंगन का किया त्याग,
ईश्वरीय भक्ति के पथ पर, मिला सच्चा भाग।

💠 अर्थ: दिन में एक बार भोजन करना, नाम-जप और ध्यान करना, ऐसे नियमों का जो पालन किया, उसका आज सम्मान मिला है।
चातुर्मास में पत्तेदार सब्जियों और बैंगन आदि का जो त्याग किया,
उससे ईश्वरीय भक्ति के मार्ग का सच्चा हिस्सा मिला।

💡 पद ४ 💡
आषाढ़ में हुआ अंकुरण, कार्तिक में फला,
व्रत के इस काल में, मन शांत हुआ भला।
अब तुलसी विवाह का, उत्सव शुरू होगा,
शुभ कार्यों की आहट, घर में लेकर आएगा।

💠 अर्थ: आषाढ़ महीने में (चातुर्मास की शुरुआत) जो संकल्पना रोपी गई, उसे कार्तिक महीने में (समाप्ति के समय) फल मिला।
इस व्रत के दौरान मन शांत हो गया।
अब तुलसी विवाह का उत्सव शुरू होगा,
जो घर में शुभ कार्यों की आहट लेकर आएगा।

🎶 पद ५ 🎶
पंढरी के विट्ठल की, वारी आज बड़ी,
वारकरियों के सुख की, मिली यह घड़ी।
संतों के अभंगों से, मिले आज ज्ञान,
साधना के दिनों का, हुआ बड़ा दान।

💠 अर्थ: आज पंढरपुर के विट्ठल की बड़ी यात्रा (वारी) भरी है।
वारकरियों के सुख की भेंट आज हुई है।
संतों के अभंगों से आज ज्ञान प्राप्त हुआ है।
साधना के इन दिनों से बड़ा पुण्य प्राप्त हुआ है।

😇 पद ६ 😇
नियम पालकर देव को, किया जो नमस्कार,
चौबीस घंटे दर्शन का, मिला अधिकार।
आत्मा शुद्ध हुई, तन पवित्र होवे,
ईश्वर से मिलने की, आस अब न होवे।

💠 अर्थ: चातुर्मास के नियमों का पालन करके देव को जो नमस्कार किया,
उससे आज चौबीस घंटे दर्शन करने का अधिकार मिला।
आत्मा शुद्ध हुई, शरीर पवित्र हुआ।
क्योंकि ईश्वर से मिलने की इच्छा (आस) अब पूरी हो गई है।

🎊 पद ७ 🎊
चातुर्मास की समाप्ति, नई उम्मीद दे,
जीवन के कार्यों को, गति फिर से मिले।
सत्कर्म और धर्म का, रखें यह पथ,
विष्णु के आशीर्वाद से, हो जीवन सफल।

💠 अर्थ: चातुर्मास की समाप्ति जीवन को नई आशा और उत्साह देती है।
जीवन के सभी कार्यों को फिर से गति मिलती है।
हमें हमेशा अच्छे कर्म और धर्म का मार्ग अपनाना चाहिए।
भगवान विष्णु के आशीर्वाद से हमारा जीवन सफल होगा।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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