🚩 सांखळी (गोवा) श्री पांडुरंग यात्रा 🚩

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:47:25 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: 🚩 सांखळी (गोवा) श्री पांडुरंग यात्रा 🚩

🏝� पद १ 🏝�
गोवा की यह सांखळी, भूमि पावन हुई,
कार्तिकी एकादशी को, पांडुरंग जत्रा भरी।
महाराष्ट्र का प्रेम, गोवा में बसता है,
विठुराया की भक्ति में, मन यह रंगता है।

💠 अर्थ: गोवा की सांखळी यह भूमि आज पवित्र हो गई है।
कार्तिकी एकादशी के दिन पांडुरंग की जत्रा (यात्रा) लगी है।
महाराष्ट्र का विट्ठल प्रेम आज गोवा में देखने को मिल रहा है।
विठुराया की भक्ति में मन पूरी तरह से रंग गया है।

🎶 पद २ 🎶
कोंकण और गोवा, एक ही उनकी वारी,
झंडा-पताका लेकर, चलते हैं वारकरी।
नारियल-सुपारी के, पेड़ों से रास्ता,
ताल, मृदंग की धुन, सजाए वास्ता।

💠 अर्थ: कोंकण (महाराष्ट्र) और गोवा इन दोनों क्षेत्रों से भक्ति की एक ही यात्रा है।
वारकरी हाथ में दिंडी की पताका लेकर चल रहे हैं।
नारियल और सुपारी के पेड़ों के जंगल से रास्ता जा रहा है।
ताल और मृदंग की ध्वनि एक बड़ा उत्सव मना रही है।

👑 पद ३ 👑
आज विष्णु जागृत, प्रबोधिनी का उत्सव,
पांडुरंग के दर्शन से, जन्म हुआ सफल।
गर्भगृह में मूर्ति, खड़ी है ईंट पर,
मुखकमल देखकर, तृप्त हुए वारकरी।

💠 अर्थ: आज भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागे हैं, यह प्रबोधिनी का उत्सव है।
पांडुरंग के दर्शन से आज का जन्म सफल हो गया है।
मंदिर के गर्भगृह में विट्ठल की मूर्ति ईंट पर खड़ी है।
उनका मुखकमल देखकर सभी वारकरी संतुष्ट हो गए हैं।

🪔 पद ४ 🪔
तुलसी का विवाह हुआ, शुभ कार्य शुरू,
आनंद की यह धारा, हृदय में बहे गुरु।
जत्रा में भीड़ है, दुकानें सजी खूब,
देव की कृपा से, हो रहा जयजयकार।

💠 अर्थ: आज तुलसी का विवाह हुआ है, इसलिए सभी शुभ कार्य शुरू हो गए हैं।
आनंद की यह धारा गुरु-कृपा से हृदय में बह रही है।
जत्रा में बहुत भीड़ है और दुकानें अच्छी तरह से सजी हैं।
भगवान की कृपा से सब जगह जयजयकार हो रहा है।

🙏 पद ५ 🙏
आँगन में डाली रंगोली, द्वार पर तोरण,
पांडुरंग को चढ़ाए, श्रद्धा के यह कारण।
गोवा की भूमि, भक्ति से सजी,
चौबीस घंटे दर्शन की, सुविधा आज मिली।

💠 अर्थ: आँगन में रंगोली बनाई है, दरवाजों पर तोरण लगाए हैं।
पांडुरंग को श्रद्धा के फूल चढ़ाए हैं।
गोवा की भूमि भक्ति से सज गई है।
आज चौबीस घंटे दर्शन करने की सुविधा उपलब्ध हुई है।

🌅 पद ६ 🌅
चिखली का काला, और दहीहंडी की मिठास,
जत्रा के उत्साह में, भक्तों को मिले आस।
साँवले विट्ठल का, दर्शन लेकर,
जीवन धन्य हुआ, भक्ति में डूबकर।

💠 अर्थ: गोवा की यात्रा में 'चिखली का काला' (कीचड़ का प्रसाद) और दहीहंडी की मिठास होती है।
जत्रा के उत्साह में भक्तों को भक्ति का सहारा मिलता है।
साँवले विट्ठल का दर्शन लेकर, भक्ति में स्नान करके हमारा जीवन धन्य हो गया है।

💖 पद ७ 💖
पंढरी के पांडुरंग, तेरी माया बड़ी,
सांखळी की जत्रा ने, दी भक्ति की घड़ी।
फिर आने के लिए देवा, मन में आस रखें,
आनंद के इस पल में, चरण तेरे पूजें।

💠 अर्थ: हे पंढरपुर के पांडुरंग, आपकी कृपा बहुत बड़ी है।
सांखळी की इस जत्रा ने हमें भक्ति की भेंट दी है।
हे देव, फिर से आने के लिए मन में इच्छा रखेंगे।
आनंद के इस क्षण में आपके चरणों की सेवा करेंगे।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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