🌳 धात्री भोजन आरंभ उत्सव 🍽️

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:48:22 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: 🌳 धात्री भोजन आरंभ उत्सव 🍽�

🌳 पद १ 🌳
हुआ चातुर्मास समाप्त, देव हुए जागृत,
धात्री भोजन का, आरंभ हो मंगलमय।
आंवले के पेड़ नीचे, आज मेला जमा,
प्रकृति के सान्निध्य में, भक्ति का रंग रमा।

💠 अर्थ: चातुर्मास समाप्त हो गया है और देवता जाग गए हैं।
धात्री (आंवले के) भोजन का आज शुभ आरंभ हो रहा है।
आंवले के पेड़ के नीचे आज लोगों का जमावड़ा लगा है।
प्रकृति की निकटता में भक्ति का अनुभव मिला।

🍽� पद २ 🍽�
विष्णु को प्रिय आंवला, पूजी आज उसे,
इस वृक्ष की छाया में, भक्तों को मिले सुख।
धन-स्वास्थ्य और, सौभाग्य का वरदान,
देव ने आज दिया, भक्त को यह मान।

💠 अर्थ: आंवला (धात्री वृक्ष) भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है, आज उसकी पूजा की गई।
इस पेड़ की छाया में भक्तों को शांति मिलती है।
भगवान ने आज भक्तों को धन, अच्छा स्वास्थ्य और सौभाग्य का आशीर्वाद दिया।

🍚 पद ३ 🍚
षड्रस का भोजन, आंवले की छाँव में,
मिठाइयाँ और पकवान, परोसे शान से।
दान-दक्षिणा और, अन्नदान बड़ा,
गरीबों को देकर, पुण्य का फल चढ़ा।

💠 अर्थ: छह रसों का स्वादिष्ट भोजन आज आंवले के पेड़ की छाया में किया जा रहा है।
मिठाई और पकवान बड़े उत्साह से परोसे गए।
दान-दक्षिणा और अन्नदान बहुत बड़ा है।
गरीबों को भोजन देकर बड़ा पुण्य प्राप्त होता है।

🙏 पद ४ 🙏
स्वास्थ्य की वह कुंजी, आंवले के फल में,
जीवनदायी गुण उसके, निश्चय ही मुख में।
धात्री पूजन से, रोग होते दूर,
शारीरिक, मानसिक, मिले बड़ा नूर।

💠 अर्थ: स्वास्थ्य की असली कुंजी आंवले के फल में है।
इसके जीवन देने वाले गुण निश्चित रूप से मुंह में महसूस होते हैं।
आंवले के पूजन से सभी रोग दूर होते हैं।
शारीरिक और मानसिक रूप से बड़ा तेज प्राप्त होता है।

💫 पद ५ 💫
तुलसी विवाह के बाद, शुभ कार्यों की आस,
धात्री भोजनारंभ से, पूर्ण हो यह प्यास।
गृहस्थ आश्रम का, यह बड़ा धर्म,
देव को तृप्त करना, यही सच्चा मर्म।

💠 अर्थ: तुलसी विवाह के बाद (द्वादशी को) सभी शुभ कार्यों की इच्छा पूरी होती है।
धात्री भोजन के आरंभ से वह इच्छा पूरी होती है।
गृहस्थ आश्रम का यह एक महत्वपूर्ण नियम है।
भगवान को तृप्त करना, यही जीवन का सच्चा रहस्य है।

🏡 पद ६ 🏡
परिवार, मित्र, संबंधी, आए सब लोग,
सामुदायिक भोजन का, महत्व अनमोल।
अन्नपूर्णा माता की, कृपा सदा रहे,
इन पवित्र पलों से, जीवन सफल होवे।

💠 अर्थ: परिवार के सदस्य, मित्र और करीबी सभी लोग एक साथ जमा हुए हैं।
सामुदायिक भोजन का महत्व बहुत बड़ा है।
अन्नपूर्णा माता की कृपा हमेशा हम पर बनी रहे।
इन पवित्र क्षणों से हमारा जीवन सफल हो।

🌿 पद ७ 🌿
धात्री भोजन से, स्वास्थ्य मिले खास,
विष्णु की कृपादृष्टि, दूर करे त्रास।
शुरुआत हुई आज, शुभ कार्यों की,
परंपरा यह बचाएं, भारतीय संस्कृति की।

💠 अर्थ: धात्री भोजन से विशेष स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
भगवान विष्णु की कृपादृष्टि सभी कष्ट दूर करती है।
आज से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो गई है।
हम भारतीय संस्कृति की यह परंपरा बनाए रखेंगे।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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