🛡️ भीष्म पंचक व्रतारंभ उत्सव 🏹

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:48:59 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: 🛡� भीष्म पंचक व्रतारंभ उत्सव 🏹

🛡� पद १ 🛡�
कार्तिकी एकादशी, आज शुभ दिन,
भीष्म पंचक का, आरंभ हो सविन।
देवोत्थान पर्व, विष्णु हुए जागृत,
पाँच दिनों के व्रत से, हो जीवन कृत।

💠 अर्थ: आज कार्तिकी एकादशी का शुभ दिन है।
भीष्म पंचक व्रत का आरंभ सम्मान के साथ हो रहा है।
देवोत्थान (देवता के जागने का) पर्व है, भगवान विष्णु जाग गए हैं।
इस पाँच दिनों के व्रत से हमारा जीवन सफल होगा।

🙏 पद २ 🙏
बाणशय्या पर भीष्म ने, कृष्ण को सुमिरन,
धर्म, नीति का ज्ञान, पांडवों को दिया।
वही है यह पंचक काल, पवित्र और महान,
व्रत पालकर देव को, लगाएँ प्रेम की तान।

💠 अर्थ: बाणों की शय्या पर रहते हुए भीष्म पितामह ने श्रीकृष्ण का स्मरण किया और धर्म तथा नीति का ज्ञान पांडवों को दिया।
वही यह पंचक काल है, जो पवित्र और महान है।
व्रत का पालन करके हम भगवान को प्रेम से पुकारें।

🍚 पद ३ 🍚
इन पाँच दिनों में लें, संयम का यह नेम,
फलाहार या, पंचगव्य का प्रेम।
मूँग दाल खाएँ, करें उपासना,
मन शुद्ध होवे, पूर्ण हो कामना।

💠 अर्थ: इन पाँच दिनों में संयम के नियम पालें।
केवल फलाहार (फल) या पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर) का सेवन करें।
मूंग दाल खाकर भगवान विष्णु की उपासना करें।
इस व्रत से मन शुद्ध होता है और इच्छाएँ पूरी होती हैं।

👑 पद ४ 👑
देवों को अर्पण, रोज पाँच फूल,
कमल, बेल और, चमेली से पूजन।
भीष्म पितामह को, नित्य तर्पण,
पितरों की शांति हेतु, यही है कारण।

💠 अर्थ: इन पाँच दिनों में हर रोज भगवान को पाँच प्रकार के फूल चढ़ाएँ।
कमल, बेलपत्र और चमेली के फूलों से पूजन किया जाता है।
भीष्म पितामह को रोज जल अर्पित करें।
पितरों की आत्मा की शांति के लिए यही मुख्य कारण है।

💫 पद ५ 💫
सत्य और ब्रह्मचर्य, भीष्म का आधार,
व्रत में लें यह, शुद्ध सा विचार।
पापों का नाश हो, मोक्ष का पथ मिले,
पांडुरंग की भक्ति का, उत्सव खुले।

💠 अर्थ: सत्य और ब्रह्मचर्य भीष्म पितामह के आधार थे।
व्रत में हमें भी शुद्ध विचार रखने चाहिए।
इस व्रत से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग मिलता है।
पांडुरंग की भक्ति का उत्सव शुरू होता है।

🌿 पद ६ 🌿
तुलसी के पौधे को, रोज दिया जलाओ,
विष्णु के मंत्रों का, जाप करते जाओ।
कार्तिक मास का, फल मिले बड़ा,
दान, तपस्या और, व्रत का हो ये घड़ा।

💠 अर्थ: तुलसी के पौधे के पास हर रोज दीपक जलाएँ।
भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप हमेशा करें।
कार्तिक मास में किए गए तप का बड़ा फल मिलता है।
दान, तपस्या और व्रत का यह समय बहुत महत्वपूर्ण है।

🕉� पद ७ 🕉�
भीष्म पंचक का, उत्सव यह महान,
मनःशांति और भक्ति, दे रही है जान।
इस पुण्य से देवा, जीवन मंगलमय हो,
भीष्म-विष्णु भक्ति में, मन यह रम जाए।

💠 अर्थ: भीष्म पंचक व्रत का यह उत्सव महान है।
इससे मन की शांति और भक्ति का बड़ा प्रभाव महसूस होता है।
हे देव, इस पुण्य से हमारा जीवन मंगलमय हो।
भीष्म पितामह और भगवान विष्णु की भक्ति में मन खो जाए।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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