🐍 श्री पाटणेश्वर यात्रा, चेंदवण (कुडाळ) 🌳

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:49:59 AM

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Atul Kaviraje

शीर्षक: 🐍 श्री पाटणेश्वर यात्रा, चेंदवण (कुडाळ) 🌳

🌊 पद १ 🌊
कोंकण की भूमि, चेंदवण गाँव खास,
पाटणेश्वर यात्रा का, आज मेला आस-पास।
कुडाळ तहसील में, शिवशंभु की माया,
दो नवंबर का रविवार, यात्रा में रमी काया।

💠 अर्थ: कोंकण की भूमि और चेंदवण गाँव विशेष है।
पाटणेश्वर यात्रा का आज बड़ा उत्सव लगा है।
कुडाळ तहसील में भगवान शंकर की कृपा है।
2 नवंबर के रविवार को यात्रा में शरीर भक्ति में खो गया है।

🙏 पद २ 🙏
पाताल से आए, स्वयंभू वह लिंग,
भोले शंकर के दर्शन से, दुख होवे भंग।
पुराने मंदिर का गर्भगृह, शांत और सुंदर,
भक्तों के मन में भरा, शिव का वह आदर।

💠 अर्थ: पाताल से स्वयं प्रकट हुआ वह शिवलिंग है।
भोले शंकर के दर्शन से सभी दुःख दूर हो जाते हैं।
पुराने मंदिर का गर्भगृह शांत और सुंदर है।
भक्तों के मन में शंकर के प्रति आदर भरा है।

🌴 पद ३ 🌴
झाड़ियाँ, नारियल बाग, और हरी वनराई,
प्रकृति के सौंदर्य में, देव यात्रा देख आई।
कोंकणी मानव की, श्रद्धा और लगन,
देव के दर्शन की, लगी यह मधुर लगन।

💠 अर्थ: झाड़ियाँ, नारियल का बाग और हरी-भरी वनराई (जंगल) है।
प्रकृति के इस सौंदर्य में भगवान यात्रा देखते हैं।
कोंकणी व्यक्ति की श्रद्धा और लगन बड़ी है।
भगवान के दर्शन की यह चाहत मन को लग गई है।

🎶 पद ४ 🎶
सुबह अभिषेक और, शाम को कीर्तन,
रात को लगी यात्रा, आनंद का वर्तन।
तुलसी विवाह के बाद, शुभ कार्यों की आहट,
देव की कृपा से, मिले नया ठाट।

💠 अर्थ: सुबह भगवान का अभिषेक और शाम को कीर्तन चल रहा है।
रात को बड़ी यात्रा लगी है और माहौल आनंदमय है।
तुलसी विवाह के बाद सभी शुभ कार्यों की आहट हुई है।
भगवान की कृपा से जीवन में नई दिशा मिलती है।

🥁 पद ५ 🥁
घोड़े की सवारी से, पालकी निकली,
जयजयकार के शोर से, भक्ति की लहर आई।
भंडारा, महाप्रसाद, बाँटा गया खास,
यात्रा में भक्तों को, शांति की मिले आस।

💠 अर्थ: घोड़े पर सवार होकर भगवान की पालकी निकली है।
जयजयकार के शोर से भक्ति की लहर आ गई है।
भंडारा (प्रसाद) और महाप्रसाद विशेष रूप से बाँटा गया।
यात्रा में भक्तों को मन की शांति की आशा मिलती है।

🎁 पद ६ 🎁
गुब्बारे, खिलौने और, तरह-तरह की दुकानें,
जत्रा की यह शोभा, कोंकण दे पुकारे।
अंगारा और तीर्थ, भक्तों को मिले,
जीवन के कष्ट, शंकर दूर करे।

💠 अर्थ: गुब्बारे, खिलौने और अलग-अलग दुकानें लगी हैं।
यात्रा की यह सुंदरता कोंकण दे रहा है।
भस्म (अंगारा) और तीर्थ भक्तों को मिलता है।
जीवन के सभी कष्ट शंकर की कृपा से दूर हो जाते हैं।

🔱 पद ७ 🔱
पाटणेश्वर के चरणों में, मस्तक यह झुका,
भक्ति का यह प्रेम, मन में है रुका।
सुखी और समृद्ध, कोंकण सदा रहे,
शंभो महादेव, जयजयकार होवे।

💠 अर्थ: पाटणेश्वर के चरणों में आज सिर झुका है।
भक्ति का यह प्रेम मन में बस गया है।
हमारा कोंकण हमेशा सुखी और समृद्ध रहे।
भगवान महादेव की हमेशा जयजयकार हो।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
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