🚩 श्री विठोबा यात्रा, बांदा (सिंधुदुर्ग) 🌴

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:50:28 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

शीर्षक: 🚩 श्री विठोबा यात्रा, बांदा (सिंधुदुर्ग) 🌴

🚩 पद १ 🚩
बांदा नगरी में, आज आनंद का खजाना,
विठुराया की यात्रा से, कोंकण दिखे नया।
सिंधुदुर्ग की भूमि को, भक्ति का श्रृंगार,
दो नवंबर का रविवार, विट्ठल का अधिकार।

💠 अर्थ: बांदा शहर में आज आनंद का खजाना है।
विट्ठल की यात्रा से कोंकण का प्रदेश नया और सुंदर दिख रहा है।
सिंधुदुर्ग की भूमि को भक्ति से सजाया गया है।
2 नवंबर के रविवार को विट्ठल अपना राज्य चला रहे हैं।

🎶 पद २ 🎶
कोंकणी माटी का, वारकरी ठाट,
झंडा-पताका लेकर, चलते लंबी वाट।
चंद्रभागा जैसी, भक्ति की यह नीर,
बांदा का पांडुरंग, भक्तों का आधार।

💠 अर्थ: कोंकण की मिट्टी के वारकरियों का यह उत्सव है।
झंडे लेकर वारकरी लंबा रास्ता चल रहे हैं।
चंद्रभागा नदी जैसी यह भक्ति की धारा है।
बांदा का पांडुरंग सभी भक्तों को सहारा देने वाला है।

🌺 पद ३ 🌺
देव के दर्शन की, लगी यह चाहट,
चेंदवण और बांदा का, एक ही हो राहट।
तुलसी के बगीचे में, दीपों की रोशनी,
माँ विट्ठला, हम तेरा रूप देखें।

💠 अर्थ: भगवान के दर्शन की इच्छा पैदा हुई है।
चेंदवण और बांदा के लोगों का एक ही कदम (एक ही दिशा में) जा रहा है।
तुलसी के बगीचे में दीपों की रोशनी की गई है।
हे माँ विट्ठला, हम तेरा सुंदर रूप देख रहे हैं।

💖 पद ४ 💖
नामस्मरण से सारे, पाप नष्ट होते,
विठोबा की कृपा से, जीवन सुखी होते।
भजन-कीर्तन चले, रात-दिन आज,
वारकरियों के गले में, अभंग का साज़।

💠 अर्थ: भगवान का नाम लेने से सभी पाप नष्ट होते हैं।
विट्ठल की कृपा से जीवन सुखी होता है।
भजन और कीर्तन आज रात-दिन चल रहे हैं।
वारकरियों के गले से अभंग के सुर सुनाई दे रहे हैं।

🌴 पद ५ 🌴
नारियल-सुपारी की, गवाही दे झाड़ी,
कोंकणी मानव की, भक्ति यह प्यारी।
यात्रा में भीड़ है, छोटे-बड़े सारे,
विट्ठल से मिलने, मन यह तरसे।

💠 अर्थ: नारियल और सुपारी के पेड़ इस भक्ति की गवाही दे रहे हैं।
कोंकणी व्यक्ति को यह भक्ति बहुत प्यारी लगती है।
यात्रा में छोटे-बड़े सभी लोग जमा हुए हैं।
विट्ठल से मिलने के लिए मन उत्सुक हो गया है।

🎁 पद ६ 🎁
पूरणपोली का भोग, बाँटा गया मीठा,
सुखी जीवन की, विट्ठल से जोड़।
दानधर्म, अन्नदान, परंपरा का मान,
बांदा के विठोबा ने, किया बड़ा सम्मान।

💠 अर्थ: पूरणपोली का भोग मीठा कहकर बाँटा गया।
सुखी जीवन की विट्ठल से जोड़ मिले।
दानधर्म और अन्नदान करके परंपरा का सम्मान किया।
बांदा के विट्ठल ने भक्तों का बड़ा सम्मान किया।

🙏 पद ७ 🙏
पंढरी के विट्ठल, तू ही कोंकण का देव,
बांदा के भक्तों पर, कृपादृष्टि रख।
फिर आने के लिए देवा, मन में आस जगाएँ,
विट्ठल नाम के रंग में, जीवन यह रँगाएँ।

💠 अर्थ: हे पंढरपुर के विट्ठल, तुम ही कोंकण के देवता हो।
बांदा के भक्तों पर अपनी कृपादृष्टि रखो।
हे देव, फिर से आने के लिए मन में इच्छा जगाएँ।
विट्ठल के नाम के रंग में हमारा जीवन रंग जाए।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
===========================================