⚔️ श्री भैरवनाथ यात्रा, चितळी (खटाव) 🐂

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:51:02 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

शीर्षक: ⚔️ श्री भैरवनाथ यात्रा, चितळी (खटाव) 🐂

🚩 पद १ 🚩
सतारा जिले का, खटाव तहसील का मान,
चितळी नगरी में, भैरवनाथ का स्थान।
आज शुभ रविवार, यात्रा का आरंभ,
दो नवंबर को, भक्ति का हो गंध।

💠 अर्थ: सतारा जिले के खटाव तहसील का सम्मान है।
चितळी गाँव में भैरवनाथ का मंदिर है।
आज का रविवार शुभ है और यात्रा की शुरुआत हुई है।
2 नवंबर को भक्ति की खुशबू फैल रही है।

⚔️ पद २ ⚔️
भैरवनाथ की मूर्ति, तेजस्वी, शानदार,
गाँव के रक्षक, यही सच्चा आधार।
उगते सूरज को, पहला नमस्कार किया,
चैतन्यमय दिन का, आज आरंभ किया।

💠 अर्थ: भैरवनाथ की मूर्ति तेजस्वी और भव्य है।
वही गाँव के रक्षक और सच्चे आधार हैं।
उगते हुए सूरज को पहला नमस्कार किया।
चैतन्यपूर्ण दिन की आज शुरुआत हुई है।

🔔 पद ३ 🔔
मन्नतें पूरी करने, आए भक्त दूर से,
डफ-तुरही के शोर से, गाँव भर गया जोर से।
चांगभलं, चांगभलं, जयजयकार बड़ा,
संसार का भार, देवा, तू ही ले उठा।

💠 अर्थ: अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए भक्त दूर-दूर से आए हैं।
ढोल-तुरही की आवाज से पूरा गाँव गूँज उठा है।
'चांगभलं' (सब अच्छा हो) का बड़ा जयजयकार हो रहा है।
हे देव, तुम ही हमारे संसार का भार उठा लो।

🐂 पद ४ 🐂
लाठी का मान और, पालकी की सवारी,
यात्रा में भक्तों ने, की बड़ी तैयारी।
भोग का थाल और, मिठाइयों की खुशबू,
भैरवनाथ की कृपा से, पूरी होती आरजू।

💠 अर्थ: सजी हुई लाठी का सम्मान और भगवान की पालकी की सवारी निकली है।
यात्रा में भक्तों ने बड़ी तैयारी की है।
भोग का थाल और मीठे व्यंजनों की खुशबू आ रही है।
भैरवनाथ की कृपा से सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं।

🎶 पद ५ 🎶
कोल्हापुर की अंबाबाई, जोगाई का जोग,
भैरवनाथ के दर्शन से, दूर होवे रोग।
सत्त्वगुणी और, तामसी रूप तेरा,
भक्तों की रक्षा हेतु, देव तू आ मेरा।

💠 अर्थ: कोल्हापुर की अंबाबाई और जोगेश्वरी माता का जयघोष होता है।
भैरवनाथ के दर्शन से सभी रोग दूर होते हैं।
तुम्हारा रूप सत्त्वगुणी (शांत) और तामसी (उग्र) दोनों है।
भक्तों की रक्षा के लिए हे देव, तुम तुरंत आओ।

🎉 पद ६ 🎉
झूला, खिलौने और, तमाशे का खेल,
यात्रा का यह आनंद, सबको मिलाए।
गाँव की सीमा पर, खड़ा रूप तेरा,
संकटों को रोके, आशीर्वाद दे मेरा।

💠 अर्थ: झूले, खिलौने और तमाशे का खेल चल रहा है।
यात्रा का यह आनंद सबको एक साथ लाता है।
गाँव की सीमा पर तुम्हारा रूप खड़ा है।
तुम संकटों को रोकते हो और उचित आशीर्वाद देते हो।

🙏 पद ७ 🙏
चितळी के भैरव, दो सबको सुख,
अगले साल मिलेंगे, देखेंगे तेरा मुख।
मन्नतें पूरी हुई आज, मन हुआ शांत,
भैरवनाथ की भक्ति का, अखंड यह प्रांत।

💠 अर्थ: हे चितळी के भैरवनाथ, तुम सबको सुख दो।
अगले साल फिर मिलेंगे और तुम्हारा दर्शन करेंगे।
आज मन्नतें पूरी हो गईं, मन शांत हो गया है।
भैरवनाथ की भक्ति का यह क्षेत्र अखंड रहे।

--अतुल परब
--दिनांक-02.11.2025-रविवार.
===========================================