सौर हेमन्त ऋतु प्रारम्भ-1-

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 11:57:21 AM

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Atul Kaviraje

दि॰ २३ अक्टूबर २०२५ (गुरुवार) — सौर हेमन्त ऋतु प्रारम्भ-

ऋतु‑परिवर्तन, भक्ति‑भाव, सामाजिक‑धार्मिक संदर्भ में यह समय विशेष है। नीचे १० प्रमुख बिंदु दिए जा रहे हैं:

1. ऋतु‑परिचय

1.1. हेमन्त ऋतु भारतीय पंचांग की छह ऋतुओं में‑से एक है।

1.2. यह हल्के शीतकालीन चरण का आरम्भ है, शरद के बाद आता है।

1.3. इस ऋतु में मौसम शांत‑ठंडा होता है, सूर्य की क्रिया धीमी पड़ती है।

2. तारिख व कालक्रम

2.1. हिन्दी स्रोतों के अनुसार हेमन्त ऋतु की शुरुआत कार्तिक/अगहन मास से होती मानी है।

2.2. आधुनिक सौर पंचांग के अनुरूप 23 अक्टूबर से इसका आरंभ माना जाता है।

2.3. इसे "दक्षिणायण का अंतिम चरण" कहा जाता है जहाँ सूर्य दक्षिण दिशा में गति कर रहा होता है।

3. धार्मिक‑संस्कृतिक महत्व

3.1. इस ऋतु को पितरों की ऋतु बताया गया है — पितृ कर्म‑दान आदि की भावना बढ़ जाती है।

3.2. कई पर्व‑उत्सव इस समय आते हैं, जैसे कार्तिक मास में दीपावली, भाई दूज आदि।

3.3. भक्ति‑भाव बलवत्तर होता है क्योंकि प्रकृति‑परिवर्तन हमें आत्म‑चिंतन की ओर ले जाता है।

4. भक्ति‑भाव का प्रसार

4.1. ऋतु बदलाव से मन में शांतिप्रवण वातावरण बनता है — यही समय है ध्यान, साधना, उपवास का।
4.2. आराधना‑प्रसाद‑दान की प्रवृत्ति बढ़ जाती है — भक्ति अधिक अल्पतर जीने की ओर प्रेरित करती है।
4.3. उदाहरणार्थ: घर‑परिवार में दीप प्रज्ज्वलन, पितृ‑समर्पण आदि क्रियाएँ।

5. स्वास्थ्य एवं जीवनशैली

5.1. आयुर्वेद के अनुसार इस ऋतु में कफ दोष बढ़ने की प्रवृत्ति है, अतः सावधानी आवश्यक।

5.2. आहार‑विहार में स्निग्ध, गर्म, घी‑तेलriched भोज्य पदार्थ तथा गर्म जल का प्रयोग लाभदायी।

5.3. ठण्डे पेय, दिन में निद्रा तथा ठंडी हवाओं का सेवन कम करना चाहिए।

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
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