यमपूजन / यमतर्पण / अरघ्यदान —1-🪔➡️💧➡️🙏

Started by Atul Kaviraje, November 03, 2025, 12:01:14 PM

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Atul Kaviraje

यमपूजन / यमतर्पण / अरघ्यदान — 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)

नीचे प्रस्तुत है इस पावन दिन के संबंध में एक विस्तृत हिन्दी लेख (१० मुख्य बिंदुओं में, उप‑बिंदुओं सहित), जिसमे भक्ति‑भाव, उदाहरण, चित्र/प्रतीक व इमोजी शामिल हैं। उसके बाद एक हिन्दी कविता है (७ चरण × ४ पंक्तियाँ प्रत्येक), तथा प्रत्येक चरण का सरल अर्थ। अन्त में पूरा हिन्दी लेख व कविता मराठी शब्द‑शब्द अनुवाद के रूप में दिया गया है।

हिंदी लेख

दिनांक: 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) — यमपूजन / यमतर्पण / अरघ्यदान
विषय: धर्म‑भक्ति‑रितु‑सम्बन्धी क्रिया‑कलाप, प्रतीक, उदाहरण व सामाजिक अर्थ

1. पर्व‑परिचय

1.1. यमपूजन और यमतर्पण उस दिन की क्रिया है, जब हम यमराज (मृत्यु एवं धर्म के देवता) का पूजन‑स्मरण करते हैं।

1.2. अरघ्यदान का अर्थ है जल, कुमकुम, अक्षत आदि सामग्री से देवता‑पितरों को अर्पण करना तथा प्रतीक‑रूप से अपनी मृत्यु‑अनिष्ट से सुरक्षा की प्रार्थना करना।

1.3. यह क्रिया विशेष रूप से कार्तिक मास, दिवाली‑उत्सव के समय तथा पितृ‑पक्ष के बाद प्रचलित है, क्योंकि मृत्यु‑धर्म‑परिवर्तन की चेतना इस समय अधिक सक्रिय मानी जाती है।

2. तिथि‑विधि एवं मुहूर्त

2.1. यमपूजन/तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त में स्नान, तिल, जल‑अर्पण, दीपदान, दक्षिण‑दिशा‑आदिबीज शामिल हैं।

2.2. तर्पण में मन, वचन व कार्य से 'श्री यमधर्मप्रीत्यर्थं यम‑तर्पणं करिष्ये' जैसे संकल्प लेना विधान है।

2.3. दीपदान विशेषतः दक्षिण दिशा की ओर करना शुभ माना गया है— यमराज की ओर प्रतीक रूप से श्रद्धा प्रकट होती है।

3. धार्मिक‑मिथकीय अर्थ

3.1. पुराणों में यमदेव को पितृ और मृत्यु‑दायक देवता माना गया है; उनकी कृपा से अनिष्ट मृत्यु और आत्मा‑व्याधि से रक्षा होती है।

3.2. यमतर्पण क्रिया द्वारा हम अपने पूर्वजों की आशीष, पितरों की तुष्टि तथा भविष्यकालीन रक्षा‑भावना को साधते हैं।
Hindu Janajagruti Samiti

3.3. इस दिन का अर्थ है — जीवन‑मृत्यु का चक्र समझना, कर्तव्यपरायणता, संयम और भक्ति‑मूलक जीवन की ओर प्रेरणा।

4. तर्पण‑अरघ्य की क्रियाएँ

4.1. स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर जल, तिल, कुमकुम आदि लेकर दक्षिण दिशा को मुख कर तर्पण करना।

4.2. जल‑अर्पण में यमराज के १४ नाम उच्चारण के साथ "ॐ यमाय नमः" वगैरह मन्त्रोच्चारण करना।

4.3. इसके बाद दीपदान करना— विशेष रूप से दक्षिणदिशा में दीपक जलाना "यमदीपदान" के नाम से मशहूर।

5. प्रतीक‑चिन्ह व इमोजी

5.1. दीपक 🪔 : अज्ञान‑अँधेरे से प्रकाश‑ज्ञान की ओर।
5.2. जल‑अर्पण 💧 : जीवन‑धारा, पूर्वज‑स्मरण, पवित्रता।
5.3. दक्षिण‑दिशा ➡️ : यमराज की दिशा, मृत्यु‑चक्र की चेतना।
5.4. प्रतीक सारांश — 🪔➡️💧➡️🙏 (प्रकाश → अर्पण → भक्ति)

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
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