📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-69-स्थितप्रज्ञ का दिन और रात-

Started by Atul Kaviraje, November 04, 2025, 11:04:34 AM

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Atul Kaviraje

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-69-

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः।।69।।

📜 स्थितप्रज्ञ का दिन और रात-

श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 2: सांख्य योग - श्लोक-69

श्लोक:
इस रात सभी प्राणी जागृत और सतर्क रहते हैं।
इस रात, जब वे जागते हैं, तो वे जागृत और सतर्क रहते हैं।
69

1. पहला कड़वा दिन (संसार का दिन) 🌞
सारा संसार भौतिक सुखों में जाग रहा है,
धन के लिए, मान के लिए, लोभ के लिए,
क्षणिक सुखों के लिए,
वे सोचते हैं कि यही असली दिन है, यही सत्य है!

श्लोक का मराठी अर्थ:
सारा साधारण संसार जागृत (प्रयासहीन) है, भौतिक सुखों, धन और सांसारिक मान-सम्मान में आसक्त है। वे सोचते हैं कि यही जीवन है और यही असली 'दिन' है।

2. दूसरी कड़वी (ऋषियों की रात्रि) 🌑
किन्तु यह दिन ऋषियों के लिए रात्रि है,
इसमें नश्वर सुख नहीं है,
जो क्षणिक है, जो केवल माया है,
उसमें संयमी शरीर शांत है!

पद का मराठी अर्थ:
किन्तु जो सामान्य लोगों को 'दिन' के समान प्रतीत होता है, वे नश्वर सुख और इन्द्रिय-सुख आत्मज्ञान प्राप्त ऋषियों के लिए 'रात्रि' के समान हैं। ऋषि उनमें कोई सत्य नहीं देखते, इसलिए उनकी बुद्धि उन सुखों के प्रति उदासीन (उदासीन) है।

3. तीसरी कड़वी (संसार की रात्रि) 🧘
सच्चा ज्ञान, आत्मा का गहन स्वरूप,
मोक्ष का मार्ग, ईश्वर का चिंतन,
वह रात्रि सामान्य लोगों के लिए अंधकारमय है,
उनके लिए कोई सहारा नहीं है!

पद का मराठी अर्थ:
आत्मा का सच्चा ज्ञान, मोक्ष का मार्ग और ईश्वर का चिंतन सामान्य लोगों के लिए 'रात्रि' के समान हैं और उनकी उपेक्षा की जाती है। वे इस शाश्वत सत्य में रुचि नहीं रखते।

4. चौथा कड़वा (योगियों का दिन) ☀️
उस रात्रि में संयमी व्यक्ति जागता है,
आत्मा का ध्यानी, त्याग में विश्राम करता है,
ब्रह्म का सुख, शाश्वत सार,
वही सच्ची सुबह है, वही ऋषियों का भार है!

पद का मराठी अर्थ:
जो व्यक्ति संयमी (योगी) है, वह उस आत्म-ज्ञान और शाश्वत सत्य में पूर्णतः जागृत (जागरूक) रहता है जिसे सामान्य लोग 'रात्रि' मानते हैं। उसके लिए आत्मा का चिंतन ही सच्ची सुबह है।

5. पाँचवाँ कड़वा (आत्म-संयम का महत्व) ⚖️
जिसकी इन्द्रियाँ पूर्णतः उसके वश में हैं,
बुद्धि सदैव आत्मा के साथ एकरूप रहती है,
दृष्टि परिवर्तन का यही सच्चा मार्ग है,
यही संसार और ऋषियों का उपदेश है!

पद का मराठी अर्थ:
केवल वही व्यक्ति जिसने अपनी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया है और जिसकी बुद्धि सदैव आत्मा से जुड़ी रहती है, एक साधारण व्यक्ति और एक ज्ञानी व्यक्ति के दृष्टिकोण के बीच अंतर को पहचान सकता है। यही उनके बीच मूलभूत परिवर्तन है।

6. छठा कड़वा (भक्ति का अनुभव) 💖
देह देह से परे है,
स्थूल चेतना से परे गति है,
ईश्वर में विश्वास अटूट है,
इसलिए उसका जीवन शांतिपूर्ण हो गया है!

पद का मराठी अर्थ:
यद्यपि संयमी व्यक्ति इस संसार में रहता है, वह देह-चेतना से परे आध्यात्मिक अवस्था का अनुभव करता है। ईश्वर और सत्य में उसका विश्वास दृढ़ है। इसीलिए उसका जीवन शांतिपूर्ण और स्थिर हो गया है।

7. सातवाँ कड़वा (आंतरिक स्वर) 🌟
बाहर रात हो या दिन,
योगी भीतर के प्रकाश को जानता है,
आंतरिक राम वहाँ निरंतर निवास करते हैं,
विषयों के क्षणिक भ्रम को त्याग दो!

श्लोक का मराठी अर्थ:
संसार की दृष्टि में चाहे रात हो या दिन, आत्मज्ञानी पुरुष सदैव अपने भीतर आत्मा के प्रकाश (ज्ञान) को जानता है। उसके हृदय में आत्म-तत्त्व सदैव जागृत रहता है और इसलिए वह क्षणिक विषयों के मोह का त्याग कर देता है।

✨ कविता सारांश (इमोजी सारांश) ✨
विश्व दिवस = 🤩 💰 (विषय-सुख) → ऋषियों की रात्रि = 😴 🚫 (प्रमाद)
विश्व रात्रि = 🌙❓ (आत्म-ज्ञान) → ऋषियों का दिवस = 🙏 🧘 (आत्म-जागरूकता)

अंतिम संदेश: योगी को आत्मा में जागृत होना चाहिए! 💡🕊�

--अतुल परब
--दिनांक-03.11.2025-सोमवार.
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