चाणक्य नीति प्रथम अध्याय -जीवन के खतरनाक चरण 🙏I।५।।-2-

Started by Atul Kaviraje, November 04, 2025, 11:19:13 AM

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Atul Kaviraje

चाणक्य नीति प्रथम अध्याय -

दुष्टाभार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः ।
संसर्प च गृहे वासो मृत्युरेव नः संशयः ।।५।।

5. पाँचवाँ चरण: मृत्यु सत्य है 🕯�

दुष्ट पत्नी, क्रूर मित्र 🤝, अभिमानी सेवक, सर्प निवास,
ये चारों ही प्राण हरने वाले हैं।
नित्य भय और चिंता, अथवा शांति और प्रेम,
इन्हें मृत्यु ही समझना चाहिए, इसमें कोई संदेह नहीं है।

(प्रत्येक श्लोक का मराठी अर्थ):

दुष्ट पत्नी, कपटी मित्र, अभिमानी सेवक:
दुष्ट पत्नी, कपटी मित्र और अभिमानी सेवक।

सांप निवास, ये चारों, प्राण हरने वाली कामना:
और घर में सांप की गंध - ये चारों ही प्राण हरने वाले हैं।

नित्य भय और चिंता, अथवा शांति और प्रेम:
इससे प्रतिदिन भय, चिंता और दुःख होता है, शांति नहीं मिलती।

इस मृत्यु को मृत्यु ही समझना चाहिए, इसमें कोई संदेह नहीं है:
चाणक्य कहते हैं, यह स्वयं मृत्यु है, इसमें कोई संदेह नहीं है।

6. छठा चरण: चाणक्य का सार 💡

चाणक्य आपको सत्य बताएँगे, 📜 जीवन का सच्चा मार्ग,
इन चारों से दूर रहो, जीवन का घाट ले लो।
मन में सुखी रहना है तो इस मोह से बचो,
सर्प और साथी, मृत्यु स्वयं क्रोध देती है।

(प्रत्येक श्लोक का मराठी अर्थ):

चाणक्य जीवन का सच्चा मार्ग बताते हैं:
चाणक्य का नीतिशास्त्र जीवन का सच्चा मार्ग बताता है।

इन चारों से दूर रहो, जीवन का घाट ले लो:
इन चार खतरनाक चीजों से दूर रहना चाहिए।

मन को सुखी रहना है तो इस मोह से बचो:
सुखी रहना है तो इस कुसंगति के मोह से बचना चाहिए।

सांप और साथी, क्रोध जो मृत्यु देता है:
सर्पों की संगति और दुष्ट लोगों की संगति ही मृत्यु का दुःख देती है।

7. सातवाँ चरण: भक्ति के उपदेश 🛐

सत्य, नीति 🙏 के मार्ग पर चलो, भक्ति, धर्म, कर्म, बुद्धि के साथ रहो,
यही संत जीवन का नाम है।
दुष्टों को दूर छोड़ो, धर्मियों का साथ दो,
चाणक्य का संदेश, जीवन का अमृत।

(प्रत्येक श्लोक का मराठी अर्थ):

सत्य, नीति, भक्ति का मार्ग अपनाओ:
सदैव सत्य और नीति के मार्ग पर चलो और ईश्वर में आस्था रखो।

धर्म, कर्म और बुद्धि: संत जीवन का नाम है:
धर्म, अच्छे कर्म और बुद्धि के साथ जीवन जियो।

दुष्टों को दूर छोड़ो, धर्मियों का साथ दो:
बुरे लोगों से दूर रहो और अच्छे लोगों की संगति करो।

चाणक्य का संदेश, जीवन का अमृत:
चाणक्य का यह संदेश जीवन का एक महान और अमूल्य ज्ञान है।

--अतुल परब
--दिनांक-03.11.2025-सोमवार.
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