📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-71-🌹 शाश्वत शांति का रहस्य 🌹

Started by Atul Kaviraje, November 07, 2025, 10:28:30 AM

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Atul Kaviraje

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक-71-

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति।।71।।

🌹 शाश्वत शांति का रहस्य 🌹
(श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित मराठी कविता - अध्याय 2: सांख्ययोग - श्लोक 71)

📜 मूल श्लोक
विहाय कामन्य: सर्वान्पुमांस्चरति निस्सप्रुहा:
निर्ममो निरहंकार: सा शांति मधिघचति..71..

✨ संक्षिप्त अर्थ
जो व्यक्ति सभी इच्छाओं का त्याग कर देता है,
आसक्ति रहित होकर कर्म करता है,
जो स्वार्थ और अहंकार को त्याग देता है,
वही परम शांति प्राप्त करता है।

💐 लंबी मराठी कविता

कड़वा 1: इच्छाओं का आरंभ और त्याग
प्रभु, आपके चरणों में, मन समर्पित है,
विहाय कामन्य: सभी, यह सत्य प्रकट हुआ है।
(जो व्यक्ति सभी इच्छाओं/इच्छाओं का त्याग कर देता है)
सुख की सारी लालसा, क्षण भर में दूर हो गई,
मेरी जीवन नौका, फिर शांत किनारे पर चली गई। 🙏

कड़वे 2: कर्म और वैराग्य
फल की आशा मत करो, कर्म का हाथ मत छोड़ो,
पुमांश्चरति निष्प्रह:, यही भक्ति का सच्चा सूत्र है।
(वह मनुष्य आसक्ति रहित होकर कर्म करता है)
कम से कम प्रयास तो पूर्ण हो, परिणाम दिव्य रहे,
कुछ मिले या न मिले, उसे व्यर्थ न गँवाओ। 😇

कड़वे 3: स्नेह और मोक्ष का बंधन
'यह मेरा है, वह तेरा है,' सभी भेद मिथ्या हैं,
निःस्वार्थ रहना चाहिए, चाहे रिश्ते कितने भी महान क्यों न हों।
(जो स्नेह/स्वाभिमान का त्याग कर देता है)
शरीर, धन, गृहस्थ, ये सब क्षणभंगुर हैं,
'स्व' को भूलकर, जीवन की यात्रा सुंदर है। 🧘

कड़वे 4: अहंकार का विलयन
मैं कर्ता हूँ, मैं भोगता हूँ, यह अहंकार महान है,
निःस्वार्थ बनना, यही मुक्ति का आधार है।
(जो अहंकाररहित है)
शक्ति तो आपकी है, हे प्रभु, मैं तो बस एक बहाना हूँ,
विनम्र भाव से जीना, यही संतों का सच्चा समागम है। 🙇

कड़वे 5: शांति की प्राप्ति
कोई महान पद नहीं, कोई स्वर्ण-माणिक नहीं,
जब मन शुद्ध होता है, तब क्षण भर के लिए शांति प्राप्त होती है।
सभी बंधन टूट जाते हैं, व्यक्ति भीतर से मुक्त हो जाता है,
स शांति मधि गच्छति, यही आत्मा की अवस्था है। 🕊�

कड़वे 6: स्थितप्रज्ञा की पहचान
वह स्थितप्रज्ञा योगी है, उसकी जीवन-पद्धति भिन्न है,
जिसके मन में, आपका प्रेम सदैव खिलता रहता है।
वही सच्चा ज्ञानी है, जिसे किसी चीज़ की चाह नहीं है,
उसका मन शांत है, गहरे समुद्र की अनुभूति के समान। 🌊

कड़वे 7: भक्ति और समर्पण
इच्छा, राग, ममता, अहंकार का त्याग करके,
जिसने आपको देख लिया, वह किनारा बन गया।
आपकी भक्ति में मेरा मन खो गया है,
सा शांति मधि गच्छति, यही परम सत्य वचन है। 💖🙏

🌼 इमोजी सारांश (इमोजी सारांश)
गुण/कार्य/अभिव्यक्ति शब्द इमोजी का पद्य में अर्थ

कामना त्याग विहाय कामना सर्वान् 🗑� सभी इच्छाओं का त्याग
निःस्पृहता चरति निःस्पृहाः 🧘 आसक्ति रहित होकर कार्य करना
निर्ममता निर्मम: 🤝मुझे जाने दो
निरंकार निरहंकार: 🙇 'मैं'पन का त्याग
परिणाम स शांतिमधिघच्छति 🕊� परम शांति की प्राप्ति

✨ अंतिम संदेश:
जो इच्छा, आसक्ति और अहंकार का त्याग करता है,
वह वास्तव में शांतिपूर्ण - स्वतंत्र और आनंदमय हो गया। 🌸

--अतुल परब
--दिनांक-05.11.2025-बुधवार.
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