कबीर दास-॥७॥ 🙏 नाम का अर्थ 🙏😄➡️😔✨🙏😭📞✨🕉️

Started by Atul Kaviraje, November 07, 2025, 10:54:43 AM

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Atul Kaviraje

कबीर दास जी के दोहे-

सुख में सुमिरन ना किया, दु:ख में किया याद।
कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद॥७॥

🙏 नाम का अर्थ 🙏
(संत कबीरदास जी पर आधारित मराठी कविता दोहा 7)

📜 मूल दोहा

सुख में सुमिरन न किया, दुख में किया याद।
कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद ॥7॥

✨ संक्षिप्त अर्थ

ईश्वर सुख में याद नहीं आते और दुःख में याद आते हैं।
कबीर कहते हैं, ईश्वर ऐसे भक्त (दास) की फरियाद क्यों सुनेंगे?

💐 लंबी मराठी कविता

कड़वा 1: सुख में विस्मृति

जब घर में, सुख की बड़ी रेखा थी,
ईश्वर का नाम पुकारते हुए, तुम कायरता से भर गए।
सुख में सुमिरन न किया, तब अभिमान खिल उठा,
बड़े आनंद के क्षणों में, तुम ईश्वर को भूल गए। 😄➡️😔

कड़वा 2: दुःख में स्मरण

जब संकट का द्वार आता है, जब सब ओर से टूट जाते हैं,
जब बल चला जाता है, बुद्धि नष्ट हो जाती है, सारी आशाएँ टूट जाती हैं।
जब दुःख में स्मरण किया, तब ईश्वर की याद आई,
मैं स्वार्थवश दौड़ा और मूर्ति के आगे गिर पड़ा। 😫

कड़वा 3: नाम जपने का नियम

सिर्फ़ नाम मत जप, संकट में पुकार,
वह तो है ही, उसे अपने पास रखो।
अगर ईश्वर से प्रेम नहीं, तो वह तुम्हारी ज़रूरत है,
सुख में भी नाम जप, भक्ति का मूल बढ़ेगा। 💖

कड़वा 4: कबीर का प्रश्न

कबीर तुझसे पूछते हैं, हे मानव, सत्य क्या है,
ईश्वर स्वार्थ के रिश्ते में क्यों रहता है?
कबीर कहते हैं कि वह दास है, (कबीर कहते हैं कि उस दास का)
तेरी ऐसी भक्ति कैसे स्वीकार हो सकती है। 🤔

कड़वा 5: प्रार्थना की सीमाएँ

जीभ केवल दुःख में ही ईश्वर का नाम लेती है,
सुख में वही जीभ स्तुति और निन्दा करती रहती है।
ऐसे पाखण्डी भक्त की प्रार्थना कैसे स्वीकार करें,
स्वार्थ से भरी पुकार ईश्वर क्यों सुनें? 🗣�

कड़वा 6: न्याय की भूमिका

ईश्वर अंतरतम को देखते हैं, शुद्ध भावों को देखते हैं,
भक्ति का यह ताना-बाना केवल काम के लिए नहीं होना चाहिए।
जो भी फरियाद सुनेगा, वह सदैव न्याय करेगा,
केवल शुद्ध भक्ति होने पर ही वह सहायता के लिए दौड़ेगा। ⚖️

कड़वा 7: अंतिम शिक्षा

संकट और सुख दोनों में नाम स्मरण हो,
दोनों ही स्थितियों में समभाव से आराधना करें।
जब निष्ठा बनी रहती है, तब ईश्वर साथी बने रहते हैं,
नाम का निरन्तर स्मरण, यही सच्ची शाश्वत गति है। ✨🙏

🕊� इमोजी सारांश

दोहे का एक अंश भावना / स्थिति उपदेश / प्रश्न इमोजी
सुख में याद न करना सुख में भूलना कृतघ्नता 😌❌
दुःख में याद न करना स्वार्थ 😭📞
कह कबीर दास हैं, भक्ति के बारे में कवि का क्या प्रश्न है 🤔
कौन सुनेगा विनती विनती न सुनना न्याय 👂🚫

🌸 अंतिम संदेश:
सुख में न भूलना और दुःख में न याद करना।
सदैव ईश्वर का नाम जपते रहो —
क्योंकि ईश्वर सदैव निस्वार्थ भक्ति का उत्तर देते हैं। ✨🕉�

--अतुल परब
--दिनांक-05.11.2025-बुधवार.
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