संत सेना महाराज-“आवडे प्रपंच सुख वाटे मना। ईश्वर भजना अंतर तो-1-🚪👤🚶‍♀️🤕🔥😢

Started by Atul Kaviraje, November 08, 2025, 02:25:12 PM

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Atul Kaviraje

संत सेना महाराज-

     "आवडे प्रपंच सुख वाटे मना। ईश्वर भजना अंतर तो।

     माय बाप बंधू भगिनी जाया। मुले मुली माया सुख नाही।

     वेळ येता व्याधी छळी, अंत होय। वाटेकरी न होय दूर राहे॥

     सेना म्हणे प्रपंच भ्रमाचा भोपळा। आत कडू पोकळा, वरी चमके॥"

🙏 प्रपंच माया और परमार्थ सार (संत सेना महाराज अभंग पर आधारित कविता) 🙏

1. मन का आकर्षण (पहला चरण) 🏘�

कविता (कविता)
प्रपंच से प्रेम किया, क्या तुम्हें नहीं मिला?
उसी में सुख मिलता है, और मन को सच्चा लगता है।
ईश्वर की भक्ति में ही दूर रहता है,
परमार्थ के मार्ग में ही दुर्लभ होता है!

मराठी अर्थ (प्रत्येक पद अर्थ)
प्रपंच से प्रेम किया, क्या तुम्हें नहीं मिला?
अर्थ: मन इस संसार के विस्तार से प्रेम करता है, पर उससे कुछ प्राप्त नहीं करता।
उसी में सुख मिलता है, और मन को सच्चा लगता है।
अर्थ: मन उसमें लीन हो जाता है और इन क्षणिक सुखों को ही वास्तविक सुख मानता है।
केवल ईश्वर की आराधना में ही मनुष्य दूर रहता है,
अर्थ: इस संसार से आसक्ति के कारण हमारा मन ईश्वर के भजन (नामस्मरण) से दूर रहता है।
केवल उसी में मनुष्य दुर्लभ होता है!
अर्थ: इसलिए, मोक्ष की ओर ले जाने वाला ईश्वरीय मार्ग हमें कठिन या दुर्लभ लगता है।

इमोजी सारांश: 🏠💖➡️🚫

2. रिश्तों की सीमा (दूसरा चरण) 👨�👩�👧�👦

कविता (कविता)
मेरे पिता और भाई, मित्र, बहनें,
बच्चे, बेटियाँ, मधुर पथ, माँ,
यह प्रेम महान है, पर शाश्वत सुख नहीं,
स्वार्थ के बंधन में केवल दुःख ही मिलता है!

मराठी अर्थ (प्रत्येक पदचा अर्थ)
मेरे पिता और भाई, मित्र, बहनें,
अर्थ: माता-पिता, भाई और मित्र जैसे सभी रिश्ते,
बच्चे, बेटियाँ, मधुर राहें, माँ,
अर्थ: इन सभी लोगों, बच्चों और बेटियों के साथ का प्रेम बहुत मधुर और प्रिय लगता है।
यह प्रेम महान है, पर शाश्वत सुख नहीं।
अर्थ: यह प्रेम और आसक्ति बहुत महान है, पर इसमें स्थायी (शाश्वत) सुख नहीं है।
स्वार्थ के बंधन में केवल दुःख ही मिलता है!
अर्थ: ये रिश्ते अक्सर स्वार्थ और अपेक्षाओं से बंधे होते हैं, जो अंततः दुःख की ओर ले जाते हैं।

इमोजी सारांश: 👪🔗💔

3. रोगों का खेल (तीसरा चरण - पूर्वार्ध) 🤒

कविता (कविता)
समय के साथ, रोग फिर शरीर को सताता है,
एकाकी पीड़ा, जीवन की लालसा बन गई है,
शारीरिक सुखों की चाहत निरर्थक लगती है,
प्रभु नाम जपने का महत्व देर से समझ में आता है!

मराठी अर्थ (प्रत्येक पदचा अर्थ)
समय के साथ, रोग फिर शरीर को सताता है,
अर्थ: जब जीवन का अंत निकट आता है, तब रोग (बीमारी) शरीर को बहुत कष्ट देने लगते हैं।
एकाकी पीड़ा, जीवन की लालसा बन गई है,
अर्थ: वे पीड़ाएँ अकेले ही सहन करनी पड़ती हैं, जिनके कारण आत्मा व्याकुल और तड़पती है।
शारीरिक सुखों की चाहत निरर्थक लगती है,
अर्थ: जिन शारीरिक सुखों के लिए हम जीवन भर दौड़ते रहे, वे अब व्यर्थ लगते हैं।
नामस्मरण का महत्व देर से पता चलता है!

अर्थ: तब नामस्मरण का असली महत्व और महत्व देर से पता चलता है!

इमोजी सारांश: 🤕🔥😢

4. अंतिम अकेलापन (तीसरा चरण - दूसरा भाग) 🚶�♂️

कविता (कविता)
जब यह समाप्त होता है, तो दूर जाना पड़ता है,
परिवार में कोई भी गीत नहीं गाता,
माया दूर खड़ी है,
सेना कहती है, भक्ति ही बहती है!

मराठी अर्थ (प्रत्येक पदचा अर्थ)
जब यह समाप्त होता है, तो दूर जाना पड़ता है,
अर्थ: जब शरीर समाप्त हो जाता है और आत्मा दूर चली जाती है।
परिवार में कोई भी गीत नहीं गाता,
अर्थ: तब परिवार में कोई भी आपके दुःख (या आपकी यात्रा) में भागीदार नहीं होता।
माया दूर खड़ी है,
अर्थ: जिन्हें आप अपना मानते हैं, उनकी माया दूर खड़ी देखती रहती है, मदद करने नहीं आती।
सेना कहती है, भक्ति ही बहती है!

अर्थ: (संत सेना महाराज कहते हैं कि) उस समय केवल ईश्वर की भक्ति ही हमारे साथ सदैव रहेगी!

इमोजी सारांश: 🚪👤🚶�♀️

--अतुल परब
--दिनांक-06.11.2025-गुरुवार.
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