तीसरा अध्यायः कर्मयोग-श्रीमद्भगवदगीता-🌸 कर्म योग-गीता: दो व्रतों का मार्ग 🌸।3।

Started by Atul Kaviraje, November 09, 2025, 06:58:21 PM

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Atul Kaviraje

तीसरा अध्यायः कर्मयोग-श्रीमद्भगवदगीता

श्रीभगवानुवाच-

लोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ।
ज्ञानयोगेन सांख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम्।।3।।

🌸 कर्म योग-गीता: दो व्रतों का मार्ग 🌸

श्लोक - 3
लोक के मन-विविध व्रत संसार में पूर्ण होते हैं।
ज्ञानयोगेन सांख्यनाम कर्मयोगेन योगिनम..3..

अन्वय (संक्षिप्त अर्थ) 📜
श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं: हे भोले अर्जुन!
मैंने पहले इस संसार में मोक्ष प्राप्ति के दो मुख्य मार्ग बताए हैं -
सांख्य सिद्धांत को मानने वालों के लिए ज्ञानयोग और
कर्मयोग, सक्रिय योगियों के लिए।

दीर्घ मराठी कविता (7 छंद) - अर्थ ✍️

छंद 1 - (संबोधन और प्रतिज्ञा)
अर्जुन, युद्धभूमि में, तुम्हारा प्रश्न महान है, 🙏
भ्रम दूर करने के लिए, अब मेरा ज्ञान ग्रहण करो!

इस सृष्टि में मैंने स्वयं दो व्रत बताए हैं, ⚖️
कल्याण के मार्ग पर, मनुष्यों को वितरित।

कड़ावे 2 - (निष्ठा का स्वरूप)
निष्ठा भक्ति की दृढ़ और सच्ची भावना है, ✨
जिससे जीवन मिलता है, ऐसा श्रेष्ठ स्वरूप।
संसार में मोक्ष जाने के दो मार्ग हैं, 🧭
एक बुद्धि से जाता है, दूसरा कर्मों से स्वर्ग देता है।

कड़ावे 3 - (ज्ञानयोग और सांख्य)
जो बुद्धि से देखता है, तत्त्वों का ज्ञान प्राप्त करता है, 📚
'मैं आत्मा हूँ, शरीर मिथ्या है', यही उन 'सांख्य' भक्तों का शोध है।
उन 'सांख्य' भक्तों के लिए केवल 'ज्ञानयोग' ही है, 💡
कर्मों को त्यागकर आत्मा में स्थिर हो जाना।

कदवे 4 - (ज्ञानयोग का अर्थ)
ज्ञानयोग का साधन, मन की शुद्धि हेतु ध्यान, 🧘
प्रकृति-पुरुष को जानना, स्वयं ईश्वर बनना।
कर्म चलते रहते हैं, इंद्रियों का वह खेल, 🎲
यह मार्ग शांति देता है, अन्यथा सामंजस्य नहीं होता।

कदवे 5 - (कर्मयोग और योगी)
जो 'योगी' हैं, कर्म मार्ग के साधक हैं, 💪
ऐसे भक्त उत्साही होते हैं, संसार के ज्ञानी मार्गदर्शक होते हैं।
केवल 'कर्मयोग' ही उन्हें मुक्ति का मार्ग प्रदान करता है, 🔱
बिना किसी फल की आशा के अपना कर्तव्य करो।

कदवे 6 - (कर्मयोग का महत्व)
कर्म करना ही एकमात्र धर्म है, कर्म को कभी मत छोड़ो, 🔄
परन्तु अपने मन को शुद्ध रखो, और उसे परम मार्ग पर लगाओ।
कर्म करते रहो, यही तुम्हारा कर्तव्य है, 💖
निष्काम कर्म ही निष्ठा है, संसार का परम सत्य है।

कदवे 7 - (निष्कर्ष और भक्ति)
अतः अर्जुन, तुम भी, क्षत्रिय महान हो, 🛡�
तुम्हारा मार्ग कर्म है, भागो मत।
यदि तुम्हें दो मार्ग दिखाई भी दें, तो दोनों मुझसे प्राप्त हैं, 🌟
इसे भक्तिपूर्वक स्वीकार करो, तुम जीवन से संतुष्ट हो जाओगे!

प्रत्येक पदचा मराठी अर्थ

पद (चरण) मराठी अर्थ
लोकेश्मिंदविविध निष्ठा या संसार में दो प्रकार की निष्ठा (साधना)।
पुरा प्रोक्त मीनाघ। हे भोले अर्जुन, मेरे (ईश्वर) द्वारा पूर्व में कहा गया!
ज्ञानयोगेन सांख्य: ज्ञानयोग द्वारा सांख्य दर्शन का पालन करने वालों के लिए (स्व-अनात्म चेतना का अभ्यास करने वालों के लिए)।
कर्मयोगेन योगिनम्। और कर्म योग द्वारा कर्मशील (कर्म करने वालों) के लिए

इमोजी सारांश (इमोजी सारांश)

अवधारणा इमोजी
श्री कृष्ण/उपदेश 🙏, 🗣�
दो निष्ठाएँ ⚖️
ज्ञान योग (सांख्य) ☯️, 💡, 🧠, 🧘
कर्म योग (योगी) 💪, 🛠�, 🎯
मोक्ष/कल्याण 🌟, 🌸

--अतुल परब
--दिनांक-09.11.2025-रविवार.
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