🏛️ चाणक्य नीति - प्रथम अध्याय, श्लोक 10 🏛️कविता-🏃‍♂️💨🤲🕊️🎁❤️

Started by Atul Kaviraje, November 09, 2025, 07:15:39 PM

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Atul Kaviraje

चाणक्य नीति प्रथम अध्याय -

लोकयात्रा भयं लज्जा दाक्षिण्यं त्यागशीलता ।
पञ्च यत्र न विद्यन्ते न कुर्यात्तत्रसगतिम् ।।१०।।

🏛� चाणक्य नीति - प्रथम अध्याय, श्लोक 10 🏛�

📜 श्लोक:
लोकयात्रा निर्लज्जता से डरती है।
पंचायतरणविद्यान्तेनकुर्यात्तरसागतिम्..10..
लोकयात्रा निर्लज्जता से डरती है।
पंचायतरणविद्यान्तेनकुर्यात्तरसागतिम्..10..
🙏 संक्षिप्त अर्थ सारांश:

🙅�♂️ व्यावहारिक ज्ञान (लोकयात्रा), पाप का भय (भय),
नैतिक लज्जा (लज्जा), उदारता (दक्षिण्यं) और त्याग —
जिस समाज में ये पाँच गुण न हों,
वहाँ निवास न करें और न ही संगति करें।

🎙� लंबी कविता (सिद्धांत और भक्ति, तुकांत सहित)
1️⃣ आरंभ (नीति का आधार) 🧭

चाणक्य गुरु का नियम, ध्रुव तारा,
कैसे चुनें संसार, नीति का वह संगम।
पाँच दिव्य गुण, आइए देखें समाज का सार,
जहाँ न मिलें, उस द्वार को छोड़ दें।

(पद का अर्थ: आचार्य चाणक्य द्वारा दिया गया यह नियम जीवन में सही मार्ग चुनने का आधार है। जहाँ न मिलें समाज के सार, उस स्थान को छोड़ दें।)

2️⃣ लोक यात्रा (अभ्यास और ज्ञान) 🤝🌍

पहली है लोक यात्रा, अभ्यास से जियो,
कड़ी मेहनत से संसार के रीति-रिवाज सीखो।
जिसके पास ज्ञान नहीं, जीने का भाव नहीं,
अंधेरे में भटकता है, उसका कोई मान नहीं।

(पोस्ट का अर्थ: पहला गुण है व्यावहारिक ज्ञान। संसार के रीति-रिवाजों को प्रयत्नपूर्वक सीखना चाहिए। जिसे संसार का ज्ञान नहीं है, उसे समाज में सम्मान नहीं मिलता; ऐसे लोगों की संगति से बचना चाहिए।)

3️⃣ धर्म का भय 😱⚖️

दूसरा है भय, मन में पाप,
अन्याय का भय, चाहे वह ज्ञात हो या अज्ञात।
जो कोई ईश्वर, धर्म और नियमों का एक क्षण के लिए भी पालन नहीं करता,
वह क्रूर पशु के समान है, उसकी संगति नहीं करनी चाहिए।

(पोस्ट का अर्थ: दूसरा गुण है बुरे कर्म करने का भय। जो व्यक्ति ईश्वर, धर्म और नियमों का पालन नहीं करता, वह क्रूर पशु के समान है; उसकी संगति करना उचित नहीं है।)

4️⃣ लज्जा (नैतिक संकोच) 🫣🤫

तीसरी लज्जा देखिए, अधर्म का ज्ञान,
लज्जा के बिना मानवता का स्वभाव बना रहता है।
जहाँ लज्जा नहीं, वहाँ अन्याय का राज है,
वहाँ महापुरुष का रहना त्याग है।

(पद का अर्थ: तीसरा गुण है बुरे कर्म करने पर लज्जा। लज्जा न हो तो मानवता समाप्त हो जाती है। जहाँ अनैतिक कर्म होते हैं, वहाँ महापुरुष का रहना उचित नहीं है।)

5️⃣ दक्षिणायम (उदारता और दया) 🎁❤️

चौथा गुण है दक्षिणायम, जो उदारता का प्रतीक है।
दूसरों के दुख से विनम्र होना चाहिए।
जहाँ उदारता नहीं, वहाँ स्वार्थ का ही बोलबाला है।
वे लोग कठोर होते हैं, उनकी मदद नहीं चाहते।

(पोस्ट का अर्थ: चौथा गुण है उदारता। दूसरों के दुख में सहानुभूति दिखानी चाहिए। जहाँ उदारता नहीं होती, वहाँ स्वार्थ ही हावी होता है, वे लोग कठोर होते हैं; उनका सहारा न लें।)

6️⃣ त्याग (समर्पण का भाव) 🤲🕊�

पाँचवाँ गुण है त्याग, परोपकार का भाव।
समर्पण से ही जीवन में सच्ची शांति मिलती है।
जहाँ त्याग नहीं, वहाँ स्वार्थ ही स्वार्थ है,
वहाँ क्यों रहना चाहिए?

(पद का अर्थ: पाँचवाँ गुण दूसरों के लिए निःस्वार्थ त्याग की भावना है। जहाँ त्याग नहीं, वहाँ स्वार्थ की भीड़ ही रहती है। जहाँ ये पाँच गुण नहीं हैं, वहाँ निवास ही क्यों करें?)

7️⃣ निष्कर्ष (संगति त्याग) 🏃�♂️❌

अतः साधक, इस सिद्धांत का आधार सुनो,
आशा स्थानि न कुर्यात्त्रासगतिं निर्धर।
जिस गाँव में ये पाँच गुण न हों,
वहाँ अपने पैरों का भार भी न रखें।

(पद का अर्थ: अतः हे साधक, नीति का आधार सुनो। यह निश्चित है कि ऐसे स्थान पर निवास या संगति नहीं करनी चाहिए। जिस गाँव या समाज में ये पाँच महत्त्वपूर्ण गुण विद्यमान न हों, वहाँ एक क्षण भी न रुकें।)

🪔 इमोजी सारांश:
नीति का नीतिशास्त्र इमोजी / प्रतीक

लोक यात्रा — अभ्यास का ज्ञान 🤝🌍
भयं — पाप का भय 😱⚖️
लज्जा — नैतिक लज्जा 🫣🚫
दक्षिण्यं — उदारता 🎁❤️
यज्ञशील — त्याग 🤲🕊�
न कुर्यात्त्रासगतिम् — संगति से बचें 🏃�♂️💨

🌿 इति चाणक्य नीति - प्रथम अध्याय, श्लोक 10 (नीति और भक्ति सहित) 🌿

--अतुल परब
--दिनांक-08.11.2025-शनिवार.
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